यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'बहुत कुछ कह सकता हूं मगर...' कन्नड़ भाषा विवाद पर कमल हासन ने माफी मांगने से किया इनकार
Kannada Language Remark अभिनेता कमल हासन कन्नड़ भाषा पर अपनी टिप्पणी के कारण विवादों में हैं। माफी मांगने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास त ...और पढ़ें

HighLights
- कन्नड़ भाषा पर टिप्पणी को लेकर उपजा विवाद
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी लगाई थी फटकार
- माफी मांगने के लिए तैयार नहीं कमल हासन
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अभिनेता कमल हासन की कन्नड़ भाषा को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद अभी थमा नहीं है। एक तरफ उन्होंने विवाद पर माफी मांगने से इंकार कर दिया है, वहीं एक प्रेस कॉनफ्रेंस में उन्होंने कह दिया कि उनके पास एक तमिल के लिए कहने को बहुत कुछ है, लेकिन वह अभी नहीं बोलेंगे।
दरअसल कमल हासने की फिल्म ठग लाइफ गुरुवार को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को लेकर निर्माता और विशेष तौर पर कमल हासन काफी उत्साहित हैं। इसी उत्साह में उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कह दिया था कि कन्नड़ असल में तमिल ने निकली भाषा है।
हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार
कमल हासन के इस बयान का कर्नाटक में जबरदस्त विरोध हुआ। कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने चेतावनी दे दी कि अगर कमल हासन ने माफी नहीं मांगी, तो उनकी फिल्म को कर्नाटक में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी उन्हें बयान के लिए फटकार लगाई थी।
आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भाषा विवाद पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया, लेकिन ये जरूर कहा कि मेरे पास एक तमिल के तौर पर बोलने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन मैं बाद में बात करूंगा। बता दें कि कमल हासन एक राजनेता भी हैं और मक्कल निधि मैयम के प्रमुख हैं।
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लोकतंत्र में जताया भरोसा
- कमल हासन ने कहा था कि हमारे देश में लोकतंत्र है और मैं कानून में भरोसा रखता हूं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल के लिए मेरा प्यार सच्चा है। केवल एजेंडा वाले लोग ही इस पर शक कर सकते हैं। मुझे पहले भी धमकी दी गई थी। अगर मैं गलत नहीं हूं, तो माफी नहीं मांगूंगा। कमल हासन ने तमिलनाडु के समर्थन के लिए आभार भी जताया।
- कमल हासन ने ये भी कहा था कि उनके बयान को गलत और संदर्भ से बाहर समझा गया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनपर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी को भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सीमा तक नहीं बढ़ाया जा सकता। आप इतिहासकार या भाषाविद नहीं हैं, जो ऐसा बयान दें।
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