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ग्लोबल वार्मिंग में भारत का योगदान सिर्फ 0.05 डिग्री सेल्सियस, अमेरिका-चीन और यूरोपीय संघ से बेहद पीछे

Published: Wed, 09 Sep 2026 11:23 PM (IST)

एक नए शोध के अनुसार, 2024 तक वैश्विक तापमान वृद्धि में भारत का योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस से भी कम ...और पढ़ें

ग्लोबल वार्मिंग में भारत का योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस

ग्लोबल वार्मिंग में भारत का योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस

HighLights

  1. 2024 तक भारत का वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान 0.05°C से कम।

  2. अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख उत्सर्जकों से भारत का योगदान कम।

  3. भारत का अधिकांश योगदान 1990 के बाद ऊर्जा और कृषि क्षेत्र से।

पीटीआई, नई दिल्ली। वर्ष 2024 तक भारत का वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान 0.05 डिग्री सेल्सियस से भी कम है। यह अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ और रूस जैसे प्रमुख उत्सर्जकों से तो कम है, लेकिन भारत वैश्विक तापमान बढ़ाने में ब्राजील, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया जैसे अन्य औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आगे है।

विडंबना है कि भारत उन देशों में से एक है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि में सबसे कम योगदान देने वाले माने जाते हैं, फिर भी यह उन देशों में शामिल हैं जिसे अपने उष्णकटिबंधीय जलवायु और घनी आबादी के कारण जलवायु परिवर्तन के सबसे खराब परिणामों का सामना करने की आशंका है।

एक नए शोध में यह जानकारी सामने आई कि वैश्विक तापमान बढ़ाने वाले वर्ष 2024 में विश्लेषित देशों में अमेरिका को लगभग 0.27 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता पाया गया। इसके बाद चीन का योगदान 0.19 डिग्री सेल्सियस रहा। यूरोपीय संघ का योगदान 0.17 डिग्री सेल्सियस था, जबकि रूस का हिस्सा 0.07-0.08 डिग्री सेल्सियस था।

ब्रिटेन स्थित क्रैनफील्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता वीके पटेल और आईआईटी खड़गपुर के पीए टकसाल ने कहा कि भारत का अधिकांश योगदान हाल के दशकों में आया है और सबसे तेज वृद्धि 1990 के बाद हुई है। देश का वर्तमान तापमान वृद्धि में संचयी योगदान अपेक्षाकृत मामूली है। हाल की तेज वृद्धि ऊर्जा प्रणाली के डिकार्बोनाइजेशन की बढ़ती महत्वता को उजागर करती है।

पर्यावरण अनुसंधान संचार पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चला कि वृद्धि मुख्य रूप से ऊर्जा क्षेत्र में जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से होने वाले कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन द्वारा संचालित है।

मीथेन व नाइट्रस आक्साइड के जरिये कृषि से भी गर्मी

कृषि मुख्य गैर-कार्बन डाइऑक्साइड गर्मी का स्रोत बनी हुई है, जिसमें मीथेन और नाइट्रस आक्साइड गैसें शामिल हैं, जो भारत के कुल योगदान का लगभग एक तिहाई से दो-पांचवां हिस्सा बनाती हैं। भारत का गैस प्रोफाइल कई प्रारंभिक औद्योगिक उत्सर्जकों की तुलना में अधिक विविध है।

वैश्विक तापमान वृद्धि में राष्ट्रीय योगदान का अनुमान लगाने से यह स्पष्ट है कि विभिन्न देशों से वर्षों के उत्सर्जन ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन को कैसे आकार दिया है। भारत के योगदान को मापना और यह देखना कि यह विभिन्न क्षेत्रों और ग्रीनहाउस गैसों में कैसे भिन्न है, भविष्य की शमन नीतियों के लिए एक उपयोगी संदर्भ प्रदान कर सकता है।

भारत के लिए गणना का कालखंड 1750-2024

टीम ने प्रमुख उत्सर्जकों ब्राजील, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और बाकी दुनिया सहित देशों के लिए वर्तमान तापमान वृद्धि में वार्षिक योगदान की गणना की। भारत के लिए वार्षिक योगदान 1750-2024 के दौरान गणना की गई। शोधकर्ताओं ने लिखा, "भारत 2024 की गर्मी में करीब 0.047-0.05 डिग्री सेल्सियस का योगदान देता है।

उन्होंने कहा, "भारत का योगदान चयनित देशों के सेट में ब्रिटेन, जापान, ब्राजील, कनाडा, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से ऊपर रखता है।"