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UN ने नए मैप में अरुणाचल और अक्साई चिन को अलग क्षेत्र दिखाया, भारत ने जताई आपत्ति

Published: Wed, 09 Sep 2026 12:17 AM (IST)

संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत-चीन के बीच अलग क्षेत्रों के रूप में दिखाए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है।

Photo Credit - un.org/geospatial/content/map-world-1

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन के चित्रण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नए विश्व मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत और चीन के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के रूप में दिखाया गया है।

भारत अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। खास बात यह है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हाल ही में पारित ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव का समर्थन किया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आधिकारिक नक्शे में भारत के संप्रभु क्षेत्रों का गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर भारत का रुख स्पष्ट और सुसंगत है।

UN के नक्शे पर भारत ने आपत्ति जताई

यह नक्शा एक जुलाई, 2026 को तैयार किया गया था। इसमें अरुणाचल प्रदेश की दक्षिणी सीमा को चीनी रेखा और उत्तरी सीमा को भारतीय रेखा के तौर पर दिखाया गया है।

नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के बीच की सीमा भी नहीं दिखाई गई है। इसके कारण अरुणाचल प्रदेश को असम और चीन से लगने वाले एक अलग क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है।

इसी तरह, अक्साई चिन को भी अलग क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। इसकी पूर्वी सीमा को भारतीय और पश्चिमी सीमा को चीनी रेखा के रूप में दिखाया गया है। भारत अक्साई चिन को लद्दाख का हिस्सा मानता है।

पुराने नक्शों की तरह नए नक्शे में भी ये रेखाएं दिखाई गई हैं, लेकिन 2011 के संयुक्त राष्ट्र के नक्शे के विपरीत, इस बार उन्हें स्पष्ट रूप से ‘दावा रेखा’ के तौर पर चिह्नित नहीं किया गया है।

जम्मू-कश्मीर और एलओसी का चित्रण

नए नक्शे में जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा (एलओसी) से बांटा गया है। एलओसी को बिंदुओं वाली रेखा के रूप में दिखाया गया है।

नक्शे के बाएं हिस्से में दिए गए फुटनोट में कहा गया है कि यह रेखा भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति वाली एलओसी को लगभग दर्शाती है और जम्मू-कश्मीर की अंतिम स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बीच अभी सहमति नहीं बनी है।

हालांकि, नक्शे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत और चीन की दावा रेखाओं के बीच अलग क्षेत्रों के रूप में क्यों दिखाया गया है।

‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव

नए नक्शे को लेकर चर्चा मार्च 2026 में शुरू हुई थी। उस समय अफ्रीकी संघ ने अफ्रीका को नक्शों में अधिक सटीक तरीके से दर्शाने के लिए एक नई पहल का समर्थन किया था, जिसे ‘संज्ञानात्मक न्याय’ का नाम दिया गया। इसके बाद टोगो ने अप्रैल में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श शुरू किया और जुलाई में संयुक्त राष्ट्र की ओर से तैयार नया नक्शा सामने आया।

यह नक्शा किसी देश के लिए बाध्यकारी नहीं है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और दुनिया भर के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की ओर से ऐसे नक्शों का इस्तेमाल किया जाता है।

कालापानी पर भारत के रुख के अनुरूप चित्रण

नए नक्शे में एक ऐसा चित्रण भी है, जिसे भारत के रुख के अनुरूप माना जा रहा है। नेपाल के साथ कालापानी सीमा विवाद में नक्शा कालापानी-लिपुलेख-लिम्पियाधुरा क्षेत्र को भारत के नियंत्रण वाले हिस्से के रूप में दिखाता है। नेपाल इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है

जागरण ब्यूरो के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में हाल में पारित ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव किसी विशेष विश्व मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेपण या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण का समर्थन या प्रमाणीकरण नहीं करता। मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने समान-क्षेत्र मानचित्रण के सिद्धांत के पक्ष में मतदान किया था, न कि किसी खास नक्शे के पक्ष में।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दुनिया के किसी भी आधिकारिक नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के संप्रभु क्षेत्रों को भारत सरकार के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं होगा।