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भारत-मॉरीशस कर संधि में बड़ा बदलाव: नया नियम लागू; 2017 से पहले के निवेश को राहत

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:27 PM (IST)

भारत और मॉरीशस ने कर संधि के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपने द्विपक्षीय कर समझौते में संशोधन किया है।

भारत-मॉरीशस कर संधि में संशोधन किया गया

भारत-मॉरीशस कर संधि में संशोधन किया गया

HighLights

  1. भारत-मॉरीशस कर संधि में संशोधन किया गया

  2. दुरुपयोग रोकने के लिए पीपीटी जोड़ा गया

  3. कर चोरी, ट्रीटी शॉपिंग पर अंकुश लगेगा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और मारीशस ने कर संधि के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए अपने द्विपक्षीय कर समझौते में संशोधन किया है। इसके तहत मौजूदा व्यवस्था में संधि के स्तर पर ‘प्रमुख उद्देश्य परीक्षण’ (पीपीटी) जोड़ा गया है। संशोधन के तहत संधि की प्रस्तावना को भी बदला गया है।

इसमें कहा गया है कि समझौते का उद्देश्य दोहरे कराधान को समाप्त करना है, लेकिन इसके जरिये कर चोरी या कर बचाने की ऐसी व्यवस्थाओं के अवसर पैदा नहीं होने चाहिए, जिनसे कर नहीं देना पड़े या कम कर देना पड़े।

इसमें तीसरे देशों के निवासियों को अप्रत्यक्ष रूप से संधि का लाभ दिलाने के लिए अपनाई जाने वाली ‘ट्रीटी शापिंग की व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।

ट्रीटी शॉपिंग का मतलब है कर संधि का लाभ लेने के लिए किसी तीसरे देश के जरिये निवेश करना या कारोबारी व्यवस्था बनाना, ताकि कम कर देना पड़े।

भारत-मारीशस दोहरा कराधान बचाव समझौते (डीटीएए) में संशोधन को 13 अक्टूबर को अधिसूचित किया गया। यह संशोधन 10 अगस्त, 2026 से प्रभावी हो गया है। हालांकि, एक अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेश पीपीटी के दायरे से बाहर रहेंगे।

एसवीएएस बिजनेस एडवाइजर्स एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर विश्वास पंजियार ने कहा कि ऐसे मामलों में निवेश की व्यावसायिक वजह, निर्णय लेने की प्रक्रिया और व्यवस्था से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होंगी।

यानी, संधि के तहत कर लाभ की पात्रता तय करने में केवल कर निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि व्यवस्था के वास्तविक उद्देश्य और स्वरूप को भी देखना होगा।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)