हाइड्रोलिक से टीसीएएस सिस्टम तक... भारत में विमान दुर्घटनाओं की जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का पुराना इतिहास
फुकेट-दिल्ली एअर इंडिया विमान में टर्बुलेंस की जांच में कमांडर पायलट का डोप टेस्ट गांजा सेवन के लिए पॉजिटिव आया है। ...और पढ़ें

विमान दुर्घटनाओं की जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का पुराना इतिहास। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
एअर इंडिया पायलट का डोप टेस्ट गांजा के लिए पॉजिटिव।
फुकेट-दिल्ली टर्बुलेंस जांच में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां शामिल।
विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम की खराबी की भी पड़ताल।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। फुकेट से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया विमान में टर्बुलेंस को लेकर चल रही जांच में बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। सरकार की ओर से कराए गए कमांडर पायलट के दूसरे डोप टेस्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि उसने मादक पदार्थों का सेवन किया हुआ था।
सूत्रों ने बताया कि पायलट के सैंपल में गांजा (मारिजुआना) पाया गया है। टेस्ट की पहली रिपोर्ट नॉन-निगेटिव आई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए नागरिक विमानन मंत्रालय ने एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन एवं अन्य अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा।
उधर, इस मामले में एएआइबी के नेतृत्व में हो रही बहुस्तरीय जांच में अब फ्रांसीसी जांच एजेंसी बीईए व एयरबस भी शामिल हो गए हैं। विल्सन पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं और उनकी जगह नए सीईओ अगले महीने पदभार संभालने वाले हैं।
उड़ान को दौरान विमान अचानक 300 फीट नीचे आया
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते चार अगस्त को एयरबस ए-320 विमान (रजिस्ट्रेशन वीटी-ईएक्सओ) उड़ान के दौरान अचानक ही करीब 300 फीट नीचे आ गया था। विमान बाद में स्थिर हो गया और उसे दिल्ली में सुरक्षित उतार लिया गया था। लेकिन इस घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू घायल हो गए थे। विमान में 137 यात्री (तीन शिशुओं सहित) और आठ क्रू सदस्य (दो पायलट व छह केबिन क्रू) सवार थे।
खबरें और भी
एअर इंडिया विमान (उड़ान एआइ-2379) के अचानक टर्बुलेंस में फंसने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस सिलसिले में एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन और वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा से मुलाकात की।
बैठक में टाटा संस के कार्यकारी सलाहकार व पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला, एअर इंडिया के फ्लाइट सेफ्टी हेड दीपक जोशी, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के महानिदेशक वीर विक्रम यादव और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआइबी) के महानिदेशक जीवीजी युगंधर भी मौजूद रहे।
फ्लाइट के पायलट ने कर रखा था गांजे का सेवन
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पहले बताया था, 'पायलट-इन-कमांड की दोबारा जांच करवाई जाएगी। इसके लिए जरूरी नमूने प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं।' अब मंगलवार को सूत्रों ने पुष्टि कर दी कि टेस्ट पॉजिटिव आया है। शुरुआती साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग में पॉजिटिव होने का संकेत मिला था।
हालांकि पायलटों के संगठन एएलपीए इंडिया का कहना था कि बिना पर्चे के मिलने वाली सामान्य दवाओं से भी पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग में "नॉन-निगेटिव" नतीजा आ सकता है।
डीजीसीए ने दोनों पायलटों को रोस्टर से हटाया
बहरहाल, जांच पूरी होने तक डीजीसीए ने दोनों पायलटों को रोस्टर से हटा दिया है। मंगलवार को देर शाम नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एएआईबी ने बयान जारी कर कहा कि घटना की जांच इंटरनेशनल सिविल एविएशन आर्गनाइजेशन (आईसीएओ) के दिशानिर्देशों के अनुसार चल रही है। फ्रांस की जांच एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंक्वायरी एंड एनालिसिस (बीईए)और एयरबस के तकनीकी प्रतिनिधि एएआईबी को सहायता दे रहे हैं।
सभी साक्ष्यों को एकत्रित कर रहा एएआईबी
एएआईबी वर्तमान में सभी प्रासंगिक तकनीकी, परिचालन, चिकित्सा और मानव-कारक साक्ष्यों के व्यवस्थित संग्रह, संरक्षण और जांच में लगा हुआ है। इसमें विमान और उसके सिस्टम, रिकॉर्डेड फ्लाइट डाटा, संबंधित परिचालन एवं रखरखाव रिकॉर्ड, चिकित्सा जानकारी और संबंधित व्यक्तियों के साक्षात्कार शामिल हैं। कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों की संपूर्णता में जांच की जाएगी।
बयान के अनुसार, 'जांच का एकमात्र उद्देश्य घटना की परिस्थितियों व कारकों का पता लगाना और दोबारा होने से रोकने के उपाय सुझाना है। जांच स्वतंत्र एवं साक्ष्य आधारित है। अधूरी जानकारी के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।'
यह भी बताया गया कि एएआईबी निर्धारित समय में उक्त घटना को लेकर आरंभिक निष्कर्ष जारी करेगा। एअर इंडिया और मंत्रालय दोनों पक्ष सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जांच में सहयोग कर रहे हैं। आम तौर पर आरंभिक निष्कर्ष घटना के एक महीने के भीतर जारी किए जाते हैं।
हाइड्रोलिक सिस्टम में एक मिनट में नौ बार आई थी खराबी
फुकेट-दिल्ली उड़ान के दौरान एयरबस ए-320 नियो के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक मिनट के भीतर नौ फॉल्ट मैसेज (खराबी के संदेश) दर्ज हुए थे। इस असाधारण तकनीकी स्थिति का विश्लेषण करने के लिए फ्रांस की जांच एजेंसी बीईए सक्रिय हो गई है, जबकि विमान निर्माता कंपनी एयरबस की एक विशेष तकनीकी टीम बुधवार को दिल्ली पहुंच रही है।
जांच टीम 360-डिग्री दृष्टिकोण अपनाते हुए यात्रियों के वीडियो, विमान क्रू के बयानों और रडार डाटा को ब्लैक बॉक्स (एफडीआर और सीवीआर) के साथ टाइम-सिंक कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टर्बुलेंस पहले आया था या हाइड्रोलिक फेलियर पहले हुआ था। वहीं, नियामक स्तर पर डीजीसीए ने ए-320 नियो विमानों के हाइड्रोलिक और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के विशेष निरीक्षण के आदेश दिए हैं।
जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग इंटरनेशनल सिविल एविएशन आर्गनाइजेशन (आइसीएओ) के अनुलग्नक-13 के तहत हो रहा है, जिसकी नींव 1944 के शिकागो सम्मेलन में रखी गई थी। इसके तहत विमान निर्माता देश को जांच में शामिल होने का कानूनी अधिकार मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग का पुराना इतिहास
भारत में विमान दुर्घटनाओं की जांच में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले 1996 के चरखी दादरी हादसे के बाद एनटीएसबी की मदद से अनिवार्य टीसीएएस सिस्टम लागू हुआ था।
2010 के मेंगलुरु हादसे के बाद एनटीएसबी और एफएए के सहयोग से पायलट थकान प्रबंधन के कड़े नियम बने थे। 2020 के कोझिकोड हादसे के बाद बोइंग की टीम की मदद से टेबलटॉप रनवे सुरक्षा और कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट में बड़े सुधार किए गए थे।