टैरिफ से ट्रेड तक ब्रिक्स का पश्चिम को कड़ा संदेश, घोषणापत्र में भारत की कूटनीतिक जीत; अहम मुद्दों पर बनी सहमति
भारत ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद नई दिल्ली घोषणापत्र जारी कराने में सफलता पाई, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले ...और पढ़ें
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026
HighLights
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा, सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई।
एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर पश्चिमी देशों को संदेश।
पश्चिम एशिया में संयम, शांतिपूर्ण समाधान, स्थानीय मुद्रा व्यापार पर जोर।
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। कई मुद्दों पर मतभेद के बावजूद भारत ने शनिवार को दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र के बाद नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनाने में कामयाबी हासिल की। इसे भारत की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा से लेकर आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों और सीमा पार आतंकी आवाजाही के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर संयम और संवाद की अपील के साथ युद्ध रोकने, परमाणु जोखिम कम करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने पर जोर दिया गया।
वहीं, एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर पश्चिमी देशों को भी कड़ा संदेश दिया गया। हालांकि घोषणापत्र में ईरान पर अमेरिकी हमलों और खाड़ी देशों पर ईरान के जवाबी हमलों का सीधा जिक्र नहीं की गया है। इसमें युक्रेन पर रूसी हमलों की आलोचना भी नहीं की गई। लेकिन गाजा हिंसा के लिए इजरायल की कड़ी आलोचना की गई है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को शिखर सम्मेलन के पहले सत्र के समापन के बाद घोषणापत्र पर सहमति बनने की जानकारी दी। इसके साथ ही उन आशंकाओं पर विराम लग गया कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर सदस्य देशों के मतभेद के कारण इस बार साझा घोषणा जारी नहीं हो पाएगी।
ईरान पर हमलों के संदर्भ में अमेरिका के सीधे उल्लेख को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद था। ब्रिक्स में फैसले आम सहमति से होते हैं और किसी एक सदस्य की असहमति भी संयुक्त घोषणा को रोक सकती है।
भोर तक चली कूटनीतिक कवायद
45 पन्नों के घोषणापत्र में 140 बिंदुओं पर सहमति बनाने के लिए भारतीय अधिकारियों को देर रात तक बातचीत करनी पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, 11 सितंबर की देर रात तक दस्तावेज के करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर सहमति बन चुकी थी।
असली अड़चन पश्चिम एशिया की स्थिति पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा पर थी। सहमति का रास्ता निकालने के लिए भारत ने ईरान और यूएई के बीच सीधे संवाद का प्रयास भी किया, जिसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच बैठक संभव हुई।
भारतीय अधिकारियों ने शनिवार तड़के करीब 2.45 बजे तक बातचीत जारी रखी। इसके बाद संशोधित मसौदा सभी देशों को भेजा गया। रूस और चीन समेत अन्य सदस्य देशों के साथ बातचीत से भी सहमति बनाने में मदद मिली। शाम साढ़े तीन बजे तक सभी सदस्यों की सहमति मिलने के बाद घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया गया। पीएम मोदी ने शाम चार बजे नई दिल्ली घोषणापत्र जारी होने का एलान किया।
एकतरफा टैरिफ पर पश्चिम को संदेश
व्यापार के मोर्चे पर घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों की आलोचना की गई है। यूरोपीय संघ के कार्बन बार्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे जलवायु आधारित व्यापार उपायों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इन कदमों को भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी बताते हुए विकासशील देशों के लिए नुकसानदेह बताया गया है। पहली बार सीबीएएम का स्पष्ट नाम लेकर पश्चिमी व्यापार बाधाओं की निंदा की गई है।
ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन में व्यापक सुधार की जरूरत दोहराई है। साथ ही ऐसी वैश्विक व्यापार व्यवस्था की मांग की गई है जिसमें उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को अधिक महत्व मिले और वैश्विक बाजारों तक उनकी समान पहुंच हो।
पहलगाम पर दो टूक, आतंकवाद पर भारत की लाइन
आतंकवाद के मामले में घोषणापत्र पिछले साल के रियो डी जेनेरियो घोषणा पत्र की लाइन पर है। घोषणा पत्र में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आतंकियों की सीमा पार आवाजाही रोकने, आतंकवाद के वित्तपोषण के नेटवर्क को तोड़ने और सुरक्षित पनाहगाहों से निपटने की जरूरत पर जोर दिया है।
आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ने और आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराने की बात भी कही गई है। पहलगाम हमले का स्पष्ट उल्लेख और सीमा पार आतंकवाद से जुड़े प्रविधान नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पश्चिम एशिया पर संयम, युद्ध रोकने की अपील
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई है। ब्रिक्स ने सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की है, जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर भी चिंता जताई गई है।
नागरिकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा तथा सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया गया है। विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने तथा क्षेत्र में स्थायी शांति के प्रयास बढ़ाने की बात कही गई है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा प्रवाह को सुचारू बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
पहली बार फलस्तीन पर विस्तृत रुख
फलस्तीन के मुद्दे को भी पहली बार घोषणापत्र में प्रमुखता दी गई है। गाजा में युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा पर चिंता जताते हुए फलस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया गया है। ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र और संप्रभु फलस्तीन देश की स्थापना के समर्थन को दोहराया है।
साथ ही संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में उचित प्रतिनिधित्व की बात कही गई है। माना जा रहा है कि यह ईरान की पहल पर हुआ। हालांकि मोटे तौर पर भारत भी इन मुद्दों का समर्थन करता है, लेकिन इजरायल के साथ भारत के करीबी संबंधों को देखते हुए इसे कुछ अचरज से देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुधार पर भारत को समर्थन
घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग दोहराई गई है। इसमें भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षा का समर्थन किया गया है। हालांकि सुरक्षा परिषद के विस्तार और भारत की स्थायी सदस्यता के सवाल पर चीन का रुख अब भी एक महत्वपूर्ण पेच बना हुआ है।
नशामुक्ति अभियान चलाने का आह्वान
घोषणापत्र में नशाखोरी और मानव तस्करी जैसे मुद्दों को मानवता के लिए गंभीर खतरा बताया गया। ड्रग्स के खिलाफ काम करनेवाली ब्रिक्स देशों की एजेंसियों द्वारा हाल में जारी गुवाहाटी घोषणापत्र का स्वागत किया गया, जिसमें आपरेशनल और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। नशामुक्ति की दिशा में भारत युद्धस्तर पर काम कर रहा है।
ब्रिक्स करेंसी पर चुप्पी, स्थानीय मुद्रा में लेनदेन पर जोर
नई दिल्ली घोषणापत्र में प्रस्तावित ब्रिक्स करेंसी का कोई उल्लेख नहीं है। ब्रिक्स में भारत के शेरपा शंभु एस कुमारन ने बताया कि आपसी कारोबार के लिए ब्रिक्स करेंसी पर कोई बात नहीं हुई। इसके बजाय सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। घोषणापत्र में सीमा पार भुगतान और संदेश प्रणालियों की पारस्परिक अनुकूलता पर काम जारी रखने की बात कही गई है।
इसमें सीमा पार भुगतान और संदेश प्रणालियों की पारस्परिक अनुकूलता के अध्ययन तथा ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने संबंधी चर्चाओं को स्वीकार किया गया है। साथ ही राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए यह माना गया है कि सभी देशों के लिए एक जैसा समाधान संभव नहीं है।
