NEET Paper Leak: नासिक के 30 वर्षीय छात्र ने परीक्षा से 45 घंटे पहले कैसे लीक किया पेपर?
नासिक के शुभम खैरनार को इस लीक का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर 10 लाख में पेपर खरीदकर 15 लाख में बेचा। ...और पढ़ें

नीट प्रवेश परीक्षा शुरू होने से 45 मिनट पहले पेपर लीक (फोटो-एएनआइ)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है।
प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को 22 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा रद कर दी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, लीक की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक से हुई, जहां से प्रश्नपत्र की पहली डिजिटल कॉपी सामने आई।
कौन है शुबम खैरनार?
सीबीआई ने नासिक के इंदिरानगर निवासी 30 वर्षीय शुबम खैरनार को हिरासत में लिया है। वह बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) का छात्र बताया जा रहा है।
आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से NEET का लीक पेपर 10 लाख रुपये में खरीदा और बाद में हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख रुपये में बेच दिया।
इस सौदे से उसने करीब 5 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र को एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप के जरिए फैलाया गया था।
मंदिर जाते समय हिरासत में लिया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार दोपहर सीबीआई ने शुबम को उस समय हिरासत में लिया जब वह कथित तौर पर मंदिर जा रहा था। जांचकर्ताओं का दावा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने बाल कटवाकर अपना हुलिया बदल लिया था। हालांकि, पुरानी तस्वीरों और तकनीकी निगरानी की मदद से उसकी पहचान कर ली गई।
स्थानीय अपराध शाखा (LCB) द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद शुबम के पिता मधुकर खैरनार ने बेटे पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में उसका नाम सामने आया है तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कैसे सामने आया पेपर लीक का मामला?
जांच में सामने आया है कि NEET का प्रश्नपत्र परीक्षा से करीब 45 घंटे पहले ही प्रसारित किया जा रहा था। मामला तब उजागर हुआ जब केरल में पढ़ रहे सीकर के एक छात्र ने कथित 'गेस पेपर' की PDF अपने पिता को भेजी। छात्र के पिता सीकर में पीजी हॉस्टल चलाते हैं।
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बताया जा रहा है कि परीक्षा की सुबह उन्होंने हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को यह पेपर देने की कोशिश की, लेकिन वे परीक्षा केंद्रों के लिए निकल चुकी थीं।
परीक्षा खत्म होने के बाद जब केमिस्ट्री और बायोलॉजी के शिक्षकों ने उस PDF की जांच की, तो कई सवाल असली प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, केमिस्ट्री के 108 में से 45 सवाल और बायोलॉजी के 204 में से 90 सवाल वास्तविक पेपर से मैच हुए।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क महाराष्ट्र से हरियाणा, राजस्थान, बिहार, जम्मू-कश्मीर और केरल तक फैला हुआ था।
सीकर के कुछ कोचिंग संस्थानों पर भी आरोप है कि उन्होंने चुनिंदा छात्रों को इन्हीं 'गेस पेपर' के आधार पर तैयारी करने को कहा था। कुछ छात्रों को PDF भेजी गई, जबकि कुछ को कथित तौर पर पेपर की हार्ड कॉपी दी गई।
राजस्थान SOG की जांच में बड़ा खुलासा
शिक्षकों द्वारा शिकायत करने की कोशिश के बावजूद सीकर पुलिस ने कथित तौर पर मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद मामला ईमेल के जरिए NTA तक पहुंचा। NTA ने सूचना इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को दी, जिसके बाद राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) को जांच सौंपी गई।
8 मई को SOG ने सीकर में उन लोगों की पहचान की जिन्होंने जयपुर से पेपर खरीदा था। जांच आगे बढ़ने पर नेटवर्क हरियाणा और फिर नासिक तक पहुंचा।
राजस्थान SOG ने अब तक इस मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कथित मास्टरमाइंड मनीष यादव और राकेश मंडवारिया भी शामिल हैं। राकेश मंडवारिया के सीकर के एक कंसल्टेंसी सेंटर से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।