विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 13, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गणित के सवाल का दूल्हे ने दिया गलत जवाब, दुल्हन का शादी से इन्कार

By Test2 test2Edited By:
Published: Fri, 13 Mar 2015 09:57 AM (IST)Updated: Fri, 13 Mar 2015 01:22 PM (IST)

दरअसल, दुल्हन को दूल्हे की शैक्षणिक योग्यता पर शक था। लिहाजा, लड़की के कहने पर उसके छोटे भाईयों ने दूल्‍हे ...और पढ़ें

News Article Hero Image

कानपुर। 15+6 कितना होता है? गणित के इस आसान से सवाल को प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाला कोई बच्चा भी हल कर सकता है। लेकिन अगर यही प्रश्न एक दूल्हे से पूछा जाए और इसका सही जवाब न देने पर उसे बिना दुल्हन वापस लौटा दिया तो निश्चित ही यह वाक्या चर्चा का विषय बन जाएगा। ऐसा अजीबोगरीब और अनोखा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में देखने में आया, जब यहां एक दूल्हे को बिना दुल्हन के बेरंग लौटा दिया गया, क्योंकि वह इस आसान से सवाल को हल नहीं कर सका।

दरअसल, दुल्हन को दूल्हे की शैक्षणिक योग्यता पर शक था। लिहाजा, लड़की के कहने पर उसके छोटे भाईयों ने दूल्हे से शादी के दरम्यान गणित का आसान का सवाल हल करने को कह दिया। उन्होंने पूछा 15+6 कितना होता है? तो दूल्हेे ने इसका जवाब दिया 17। बस, लड़की का शक सही निकला और उसने शादी करने से इनकार कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, इटावा जिला निवासी रामबरन बारात लेकर मोहर सिंह की पुत्री लवली से शादी करने पहुंचा था। शादी का पूरा माहौल था। बाराती और रिश्तेेदार भी खूब हंसी-खुशी के साथ शादी में शरीक हुए, लेकिन इस सवाल को पूछ लिए जाने पर रंग में भंग पड़ गया।

लड़की ने अपने घरवालों ने साफ कह दिया कि वह अनपढ़ शख्स से शादी नहीं करेंगी। हालांकि लड़के वालों ने लड़की पक्ष और दुल्हन को काफी समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वह नहीं माने।

लड़की के पिता ने कहा कि पहली कक्षा का छात्र भी इस आसान से सवाल का जवाब दे सकता है, लेकिन लड़के वालों ने हमें लड़के की योग्यता को लेकर अंधेरे में रखा। यह हमारे लिए बेहद शर्मनाक स्थिति थी। हमने सारी तैयारियां की हुई थीं। यह हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रश्न था। हमारे साथ धोखा हुआ।

गुस्साए लड़की वालों ने पुलिस को कॉल भी कर दी, लेकिन गांव के बड़े-बुजुर्गों के हस्तक्षेप के बाद समझौते के तहत पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

पढ़ें : न पंडित, न कचहरी, बस सादा कागज और सात जन्मों का अटूट बंधन