नए कानून के तहत ट्रिब्यूनल के 248 सदस्यों का बढ़ाया गया कार्यकाल, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2026 के तहत 248 न्यायाधिकरण सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
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सरकार ने 248 न्यायाधिकरण सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया
HighLights
सरकार ने 248 न्यायाधिकरण सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया
सुप्रीम कोर्ट को न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम की जानकारी दी
एनजीटी के तीन सदस्यों का कार्यकाल भी अंतरिम रूप से बढ़ा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि विभिन्न न्यायाधिकरणों के 248 सदस्यों को न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2026 के तहत कार्यकाल बढ़ाने के योग्य पाया गया है और उनकी सेवा में विस्तार किया जा रहा है।
सरकार ने कहा कि नए कानून के तहत योग्य पाए गए न्यायाधिकरण के सदस्य तब तक अपने पद पर बने रहेंगे, जब तक वे तय पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर लेते या अधिकतम आयु सीमा तक नहीं पहुंच जाते।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने यह संज्ञान लिया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के तीन सदस्य (दो न्यायिक और एक तकनीकी) आज अपना कार्यालय छोड़ रहे हैं और इससे इस न्यायाधिकरण के कामकाज पर विपरीत असर पड़ेगा।
पीठ ने अंतरिम उपाय के रूप में एनजीटी के तीन सदस्यों का कार्यकाल तब तक के लिए बढ़ा दिया, जब तक उनके पदों पर नई नियुक्तियां नहीं हो जातीं।
सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने पीठ को सूचित किया कि नए कानून की धारा 24 के तहत विभिन्न न्यायाधिकरणों के 248 सदस्यों को सेवा विस्तार देने के योग्य पाया गया है।
इनमें से 229 सदस्यों के कार्यकाल बढ़ाने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष 19 सदस्यों के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
