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'बेबुनियाद और भ्रामक', मस्क ने किया स्टारलिंक को भारत में रोकने का दावा तो सरकार ने दिया जवाब

Published: Thu, 08 Oct 2026 10:30 AM (IST)Updated: Thu, 08 Oct 2026 01:04 PM (IST)

सरकार ने एलन मस्क के उस दावे को खारिज किया है कि भारत में स्टारलिंक को कुछ खास रईस लोगों द्वारा रोका जा रहा है।

एलन मस्क के दावे को सरकार ने किया खारिज। (फाइल फोटो।)

एलन मस्क के दावे को सरकार ने किया खारिज। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. सरकार ने एलन मस्क के स्टारलिंक रोकने के दावे को खारिज किया।

  2. भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क निष्पक्ष और भेदभाव-रहित है।

  3. सभी लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटर समान नियामक प्रक्रिया और सुरक्षा जांच से गुजर रहे हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को एलन मस्क के उस दावे को खारिज कर दिया कि भारत में स्टारलिंक के प्लान को कुछ खास रईस लोगों (ओलिगार्क्स) द्वारा रोका जा रहा है। सरकार ने कहा कि देश का सैटेलाइट कम्युनिकेशन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क निष्पक्ष और भेदभाव-रहित है।

संचार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि तीनों लाइसेंस प्राप्त सैटेलाइट कम्युनिकेशन ऑपरेटर अभी मोटे तौर पर एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं और स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग करने से पहले वे सुरक्षा संबंधी जांच से गुजर रहे हैं।

सरकार ने मस्क के दावे को किया खारिज

एक पर पोस्ट में मंत्रालय ने कहा, "सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया जा रहा है जिसमें कहा गया है कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के लिए भारत का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क निष्पक्ष नहीं है और इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है।"

इसमें कहा गया, "सरकार ने सभी टेलीकॉम सर्विस के लिए एक निष्पक्ष और भेदभाव-रहित ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क बनाया है। इसके तहत भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता के हिस्से के तौर पर नॉन-जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट ऑर्बिट आधारित सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस देने वाली तीन ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट कंपनियों को टेलीकॉम लाइसेंस दिए गए हैं। लाइसेंस की शर्तों के अनुसार, हर लाइसेंसधारी को सुरक्षा शर्तों का पालन करना जरूरी है।"

इसमें आगे कहा गया, "इसका मकसद यह पक्का करना है कि दी जाने वाली सर्विस सभी यूजर्स और उनके डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी सिक्योरिटी नियमों को पूरा करें। इस प्रोसेस के तहत तीनों लाइसेंस लेने वाली कंपनियों की सिक्योरिटी जांच अभी चल रही है। जब किसी लाइसेंस वाली कंपनी के लिए यह प्रोसेस पूरा हो जाएगा तो वह स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट पाने के अगले चरण में जा सकेगी। अभी तीनों कंपनियां मोटे तौर पर एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं। इसलिए यह सुझाव कि फ्रेमवर्क या उसका लागू होना गलत या भेदभावपूर्ण है, बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।"

मस्क ने क्या आरोप लगाया था?

मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत में एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को रोका जा रहा है और इसे भारत के लोगों के खिलाफ अपराध बताया था। वहीं, स्टारलिंक ने कहा है कि उसने भारत में 20 गेटवे साइट्स बनाई हैं और भारत के हिसाब से सुरक्षा कंट्रोल तैयार किए हैं।

7 अक्टूबर को इंडिया मोबाइल कांग्रेस में बोलते हुए स्टारलिंक की वीपी (वाइस प्रेसिडेंट) लॉरेन ड्रायर ने कहा कि कंपनी भारतीय यूजर्स का डेटा भारत में ही रख रही है और कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया है।

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