'अग्नि-6 मिसाइल के लिए हम पूरी तरह तैयार'; बोले DRDO प्रमुख
डीआरडीओ प्रमुख ने घोषणा की है कि संगठन अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-6' के विकास के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसकी मारक क्षमता 10,000 किमी से अ ...और पढ़ें

डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामत(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के अनुभवों ने आधुनिक युद्ध में मिसाइलों और ड्रोन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत भी लंबी, मध्यम और छोटी दूरी की मिसाइलों तथा ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कहा कि वह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-6' के विकास के लिए पूरी तरह तैयार है।
डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामत ने गुरुवार को कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर है और मंजूरी मिलते ही संगठन इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। बता दें कि भारत वर्तमान में अग्नि-5 को तैनात कर चुका है, जो 5000 किमी से अधिक की रेंज वाली मिसाइल है। इसका एमआइआरवी परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस परीक्षण में एक मिसाइल पर कई वारहेड लगाकर अलग-अलग निशाने साधे जाते हैं।
अग्नि 6 की मारक क्षमता तोड़ेगी रिकॉर्ड
वहीं अग्नि 6 की मारक क्षमता 10000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक होगी। इस मिसाइल की जद में चीन के महत्वपूर्ण सामरिक ठिकाने होंगे। एएनआइ की राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0 में डीआरडीओ प्रमुख कामत ने कहा कि अग्नि-6 एक उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल होगी। इसकी मारक क्षमता भारत की अग्नि श्रृंखला की मौजूदा प्रणालियों की तुलना में अधिक होगी और क्षमताएं भी बेहतर होंगी।
एंटी शिप मिसाइल पर भी चल रहा कामसम्मेलन में डीआरडीओ अध्यक्ष कामत ने यह भी उल्लेख किया था कि भारत का एलआर-एएसएचएम (लांग रेंज-एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल) हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम भी उन्नत चरण में पहुंच गया है, और जल्द ही प्रारंभिक परीक्षण होने की उम्मीद है। कामत ने कहा कि भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल, दोनों प्रणालियों पर काम कर रहा है, जिसमें ग्लाइड संस्करण वर्तमान में विकास के मामले में आगे है।
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ग्लाइड बनाम क्रूज मिसाइल
ग्लाइड बनाम क्रूज मिसाइल कामत ने दोनों प्रणालियों के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है और उड़ान के दौरान इसे ऊर्जा मिलती है। हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल प्रारंभिक वेग प्राप्त करने के लिए बूस्टर का उपयोग करती है और फिर बिना किसी ऊर्जा के ही ग्लाइड करती है। कामत ने संकेत दिया कि ग्लाइड मिसाइल का परीक्षण जल्द ही किया जा सकता है। समीर कामत ने कहा कि सबसे पहले ग्लाइड मिसाइल आएगी।
हमें जल्द ही पहले परीक्षण करने चाहिए और यह क्रूज मिसाइल की तुलना में अधिक उन्नत चरण में है। उन्होंने प्रस्तावित पारंपरिक मिसाइल बल की संरचना की भी रूपरेखा प्रस्तुत की, जिस पर अब भी विचार किया जा रहा है। उनके अनुसार, बल को विभिन्न श्रेणियों और सामरिक भूमिकाओं के लिए विभिन्न प्रणालियों के मिश्रण की आवश्यकता होगी।
मिसाइल-ड्रोन की तुलना में लड़ाकू विमान किफायती: एयर मार्शल दीक्षितएकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा है कि भविष्य के युद्ध में सिर्फ ड्रोन और मिसाइलों जैसे 'सस्ते' विकल्पों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। पारंपरिक और आधुनिक हथियारों का संतुलित इस्तेमाल ही प्रभावी रणनीति साबित होगा।'
ड्रोन-मिसाइल बनाम लड़ाकू विमान की बहस
एएनआई राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2.0' में ड्रोन-मिसाइल बनाम लड़ाकू विमान की बहस पर दीक्षित ने साफ किया कि केवल लागत के आधार पर निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि अगर किसी हवाई अड्डे पर हमला होता है, तो उसकी मरम्मत हो सकती है।
सवाल यह है कि आप कितनी बार और किस लागत पर हमला कर पाएंगे।उन्होंने जोड़ा कि लंबी अवधि में लड़ाकू विमान कई बार अधिक किफायती साबित होते हैं, क्योंकि वे बार-बार उड़ान भर सकते हैं और उनसे इस्तेमाल होने वाले हथियार अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं।स्वदेशी प्रणालियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस महंगी है, इसलिए लागत-क्षति अनुपात का संतुलन जरूरी है। दीक्षित ने अंत में कहा कि किसी भी कमांडर के पास हर तरह के विकल्प उपलब्ध होने चाहिए, ताकि हालात के मुताबिक सही फैसला लिया जा सके।
10000 किमी होगी अग्नि 6 की मारक क्षमता- हल्के पेलोड के साथ यह 14-16 हजार किमी तक भी जा सकती है- एक मिसाइल पर कई परमाणु वारहेड लगाए जा सकते हैं- 3 टन (3,000 किलोग्राम) का परमाणु या थर्मोन्यूक्लियर वारहेड लगा सकते हैं - 11 वारहेड ले जा सकती है एक मिसाइल। हर वारहेड 250 किलोटन तक की शक्ति वाला - 55,000 से 70,000 किलोग्राम (55-70 टन) तक वजह होगा एक मिसाइल का- 30870 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है अग्नि 6 की रफ्तार
आवाज से 10 गुना तेज होगी एंटी शिप मिसाइल
नौसेना की तटीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हाइपरसोनिक मिसाइल - सटीकता के लिए इसमें स्वदेशी एवियोनिक्स और अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं- मिसाइल की मैक 10 (ध्वनि की गति से 10 गुना) यानी 12,000 किमी/घंटा तक की अधिकतम रफ्तार - एलआर-एएसएचएम अधिकतम 1,500 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है।
यह बैलिस्टिक मिसाइल की तरह सीधी नहीं जाती, बल्कि दिशा बदलते हुए लक्ष्य की तरफ बढ़ती है - कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के कारण ये मिसाइल दुश्मन के जमीनी और समुद्री राडार की पकड़ में नहीं आती।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)