विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

साइबर ठगों का नया पैंतरा: अब मुख्य हैंडलर खुद ही चला रहे हैं बैंक खाते, पुलिस को चकमा देने की नई चाल

Published: Sun, 09 Aug 2026 05:36 AM (IST)Updated: Sun, 09 Aug 2026 06:59 AM (IST)

म्यूल (किराये के) खातों के विरुद्ध मध्य प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में अलग-अलग अभियान चलाए गए लेकिन साइबर ठगों ने ...और पढ़ें

साइबर ठगों की पुलिस से बचने की नई चाल, अब हैंडलर ही संचालित कर रहे खाते (सांकेतिक तस्वीर)

साइबर ठगों की पुलिस से बचने की नई चाल, अब हैंडलर ही संचालित कर रहे खाते (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. एपीके फाइल की मदद से लेते हैं ओटीपी ताकि पकड़ में न आएं 

  2. मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी 21 करोड़ की ठगी के बाद सामने आया नया तरीका

जेएनएन, ग्वालियर। म्यूल (किराये के) खातों के विरुद्ध मध्य प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में अलग-अलग अभियान चलाए गए लेकिन साइबर ठगों ने पुलिस को धता बनाने के लिए नई तरकीब निकाल ली है।

खातों के नेटवर्क को संचालित करने के लिए ठगों ने हैंडलर रख दिए हैं। तकनीकी रूप से दक्ष युवकों को हैंडलर बनाया जा रहा है। ये हैंडलर दूर-दराज के राज्यों में बैठकर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और बैंक खातों को ऑपरेट करते हैं। वह एपीके फाइल की मदद मोबाइल हैक कर खुद ओटीपी लेते हैं, ताकि पकड़ में न आएं।

बता दें कि पुलिस को यह सच्चाई मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की जांच में पता चली। यह ठगी पिछले दिनों ग्वालियर के चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय के साथ हुई थी। पुलिस जांच में जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो पहली बार इस हाईटेक 'हैंडलर नेटवर्क' की पोल खुली।

पुलिस ने एक हैंडलर अंकित वर्मा को गिरफ्तार किया। जिसने मप्र के शाजापुर के जिला पंचायत सदस्य व भाजपा नेता जगदीश कुमार मालवीय का खाता हैंडल किया था। ठगी के 50 लाख रुपये मालवीय के खाते में आते ही दूसरे म्यूल खातों में ट्रांसफर किया।

इस नए मॉडल में खाताधारक (जिसके नाम पर म्यूल अकाउंट है) को सीधे तौर पर कोई तकनीकी काम नहीं करना पड़ता। यह पूरा नेटवर्क बेहद स्मार्ट तरीके से चलता है, जिससे पुलिस को उलझाया जा सके।

खाताधारक के पास केवल उसका एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक रहती है। हैंडलर पीड़ित या खाताधारक के फोन में एपीके फाइल भेजकर स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करवा देते हैं। स्क्रीन शेयरिंग के जरिए हैंडलर के पास फोन में आने वाले हर ओटीपी का सीधा एक्सेस होता है।

मल्टीपल खालों में पैसे ट्रांसफर जैसे ही ठगी का रुपया उस म्यूल खाते में आता है, दूसरे राज्य में बैठा हैंडलर बिना देरी किए उस राशि को कई अन्य 'मल्टीपल' खातों में ट्रांसफर कर देता है।

लेन-देन पूरा होते ही खाताधारक का तय कमीशन (हिस्सा) उसी खाते में छोड़ दिया जाता है, जिसे वह एटीएम से आसानी से निकाल लेता है। शातिर हैंडलर एपीके फाइल के जरिए ओटीपी अपने मोबाइल पर मंगवाते हैं। ऐसे में पुलिस नेटवर्क में ही उलझी रहती है।