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    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ताड़मेटला माओवादी हमला मामले में सभी आरोपित बरी, 76 जवान हुए थे बलिदान

    Updated: Fri, 08 May 2026 02:08 AM (IST)

    76 जवानों के बलिदान से जुड़े इस चर्चित केस में राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सभी आरोपितों को बरी करने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दक्षिण बस्तर ...और पढ़ें

    ताड़मेटला माओवादी हमला मामले में सभी आरोपित बरी (सांकेतिक तस्वीर)

    ताड़मेटला माओवादी हमला मामले में सभी आरोपित बरी (सांकेतिक तस्वीर)

    HighLights

    1. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को किया खारिज 

    2. कहा- यह अत्यंत पीड़ादायक है, अभियोजन एजेंसियां जांच में हुईं नाकाम

    जेएनएन, बिलासपुर। सुकमा के ताड़मेटला माओवादी हमले के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

    76 जवानों के बलिदान से जुड़े इस चर्चित केस में राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सभी आरोपितों को बरी करने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दक्षिण बस्तर के निर्णय को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा।

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जांच एजेंसियों की नाकामी पर कड़ी टिप्पणी की।

    बेंच ने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि माओवादियों द्वारा किए गए क्रूर हमले में सीआरपीएफ के जवानों की मृत्यु के बावजूद अभियोजन एजेंसियां असली अपराधियों की पहचान करने में असफल रहीं।

    बता दें कि इस हत्याकांड के आरोपितों को दक्षिण बस्तर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सात जनवरी 2013 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

    सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कोर्ट में जांच की कमियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समझने में विफलता दिखाई। हालांकि, साक्ष्यों की कमी के कारण हाई कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

    कोर्ट ने भविष्य के लिए निर्देश दिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में फोरेंसिक सबूत समय पर जुटाए जाएं। यह था मामलायह मामला छह अप्रैल 2010 का है, जब सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन और पुलिस बल की संयुक्त टीम पर माओवादियों ने हमला किया था, जिसमें 76 जवान बलिदान हुए थे।