छत्तीसगढ़ HC का बड़ा फैसला, नाबालिग की सोनोग्राफी करने मात्र से डॉक्टर पर नहीं चलेगा पॉक्सो का केस; FIR रद
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक चिकित्सक के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट की कार्रवाई रद्द कर दी है, जिसमें नाबालिग गर्भवती की सोनोग्राफी करने पर आरोप था। ...और पढ़ें

HighLights
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने डॉक्टर पर पॉक्सो कार्रवाई रद्द की।
नाबालिग गर्भवती की सोनोग्राफी मात्र से अपराध नहीं।
यौन अपराध की जानकारी बिना डॉक्टर पर मुकदमा नहीं।
जेएनएम, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक चिकित्सक के विरुद्ध की गई पॉक्सो एक्ट की कार्रवाई को रद कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग गर्भवती की सोनोग्राफी करने मात्र से चिकित्सक के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
यदि प्रथम दृष्टिया ऐसे साक्ष्य नहीं है जिससे सिद्ध हो कि चिकित्सक को यौन अपराध की जानकारी होने की आशंका थी, तो उसके विरुद्ध मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। प्रकरण के अनुसार, याचिकाकर्ता राजनांदगांव की रेडियोलाजिस्ट डॉ. आरती उइके (वास्कले) पर आरोप था कि उन्होंने 15 वर्षीय नाबालिग गर्भवती की सोनीग्राफी की और पॉक्सो अधिनियम के तहत इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी, जिससे उनके खिलाफ धारा 21 के तहत पूरक चालान पेश किया गया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 19 के तहत सूचना देने का दायित्व तभी उत्पन्न होता है, जब संबंधित व्यक्ति को अपराध की जानकारी हो या अपराध होने की आशंका हो।
पीठ ने कहा कि सामान्य चिकित्सकीय कर्तव्य निभाते हुए सोनोग्राफी करना अपने आप में आपराधिक मामला नहीं बनाता। केवल अनुमान या आशंका के आधार पर किसी डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
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