विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बंगाल में बदल जाएगा सत्ता का केंद्र, पुरानी इमारत से नई राजनीति को धार देने की तैयारी में भाजपा

By Arvind SharmaEdited By: Deepak Gupta
Published: Wed, 06 May 2026 08:36 PM (IST)

भाजपा बंगाल में ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग को फिर से सत्ता का केंद्र बनाने की तैयारी में है, जिसे ममता बनर्जी ने 'नबन्ना' में स्थानांतरित कर दिया था।

कोलकाता की ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग। (सोशल मीडिया)

कोलकाता की ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग। (सोशल मीडिया)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। बंगाल में भाजपा की नई सरकार ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग को फिर से सत्ता के केंद्र में लाने की तैयारी में है। 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद इसे वामपंथी दौर का प्रतीक मानते हुए प्रशासनिक पावर से अलग कर दिया गया और नया सचिवालय 'नबन्ना' में स्थानांतरित कर दिया गया। प्रत्यक्ष तौर पर इसे मरम्मत का बहाना बनाकर किया गया।

अब जब सत्ता बदली है तो भाजपा सरकार नबन्ना की जगह फिर से राइटर्स बिल्डिंग में जा सकती है। यह इमारत तीन शताब्दियों से बंगाल की सत्ता, संघर्ष और राजनीतिक विरासत का जीवंत प्रतीक रही है।

लाल रंग की इस इमारत का डिजाइन 1777 में थॉमस लियोन ने तैयार किया था। लंबे समय तक ईस्ट इंडिया कंपनी का यह मुख्यालय आजादी के बाद बंगाल सरकार के सचिवालय के रूप में तब्दील हो गया।

राइटर्स बिल्डिंग को पुनर्जीवित करेगी भाजपा

सूत्रों के अनुसार, अब भाजपा इस ऐतिहासिक भवन को पुनर्जीवित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चुनाव परिणाम के बाद इसकी साफ-सफाई और प्रारंभिक निरीक्षण शुरू हो चुका है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भवन की स्थिति का आकलन किया है।

शुरुआत में सीएम कार्यालय समेत कुछ प्रमुख विभागों को यहां स्थानांतरित करने पर विचार हो रहा है। यदि भाजपा इस पर आगे बढ़ती है तो न केवल ऐतिहासिक इमारत का पुनरुद्धार होगा, बल्कि बंगाल की राजनीति में इतिहास के सहारे भविष्य गढ़ने की रणनीति का उदाहरण भी बन सकता है।

सांस्कृतिक प्रतीकों के सहारे नया नैरेटिव गढ़ना चाहती है भाजपा

इस कदम को राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा बंगाल में अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए इतिहास और सांस्कृतिक प्रतीकों के सहारे नया नैरेटिव गढ़ना चाहती है। राइटर्स बिल्डिंग के जरिए संदेश देने की कोशिश होगी कि सत्ता परिवर्तन केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रशासनिक परंपराओं और प्रतीकों की भी सम्मानजनक वापसी है।

प्रशासनिक शक्ति का केंद्र रही राइटर्स बिल्डिंग

राइटर्स बिल्डिंग को ईस्ट इंडिया कंपनी के उन कर्मचारियों के लिए बनाया गया था, जिन्हें 'राइटर्स' कहा जाता था। बाद में यह प्रशासनिक शक्ति का केंद्र बन गया। 150 मीटर लंबी और 55 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैली यह इमारत टेराकोटा ईंटों से बनी है और अपने विशिष्ट स्थापत्य के लिए जानी जाती है।

यह भवन कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी भी रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बिनय बसु, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता ने यहीं ब्रिटिश अधिकारी सिम्पसन की हत्या कर औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी थी। बाद में इन्हीं तीनों के नाम पर डलहौजी स्क्वायर का नाम बदलकर बीबीडी बाग रखा गया।

मात्र 16 करोड़ की लागत से लौट सकता है गौरव

सरकार ने स्टडी का काम जाधवपुर विश्वविद्यालय को सौंपा था, जिसके माध्यम से कोटेक्स कंपनी ने किया। रिपोर्ट में बताया गया कि थोड़ी मरम्मत, वाटरप्रूफिंग और संरचनात्मक मजबूती के बाद भवन में सचिवालय का काम संचालित किया जा सकता है। इसपर मात्र 16 करोड़ की लागत आएगी। लेकिन वामदलों से बदला की भावना के तहत सरकार ने रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भवन उपयोग के लायक है। सारे हिस्से सामान्य भार वहन करने में सक्षम हैं। हालांकि कुछ समस्याएं हैं। जैसे कॉरिडोर में पत्थर की स्लैब को आरसीसी स्लैब से बदलने के कारण दरारें आई हैं। सीपेज, नमी, प्लास्टर क्षति और पुराने एवं नए निर्माण के असंगत मेल से संरचना पर दबाव है।

भूकंपीय दृष्टि से बड़े हाल की छतों को हल्का संवेदनशील बताया गया है, जिसे मरम्मत कर ठीक किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- 'इस्तीफा नहीं दूंगी...; ममता जाएंगी सुप्रीम कोर्ट? विधायकों को दिया नया टास्क