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Mission UP 2027: यूपी के लिए अमित शाह बना रहे 5 फैक्टर वाला प्लान, चार महीने में ही हो जाएगा खेला

Published: Thu, 28 May 2026 08:00 PM (GMT+05:30)Updated: Thu, 28 May 2026 08:35 PM (GMT+05:30)

पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत के बाद अमित शाह अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुट गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)

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संक्षेप में पढ़ें

नीलू रंजन, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत के बाद अमित शाह अब उत्तरप्रदेश को साधने की तैयारी में जुट गए हैं। इस सिलसिले में जून से ही उनका उत्तरप्रदेश का दौरा शुरू हो सकता है। जून से सितंबर तक पूरे उत्तरप्रदेश का दौरा कर शाह प्रदेश की राजनीति नब्ज को टटोलने की कोशिश करेंगे ताकि उसके आधार पर चुनावी रणनीति तैयार की जा सके।

उत्तरप्रदेश में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होना है। वैसे अभी तक अमित शाह के उत्तरप्रदेश दौरे का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जून में उनका दो क्षेत्रों में दौरे का कार्यक्रम बनाया जा रहा है। सबसे पहले वे बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र का दौरा करेंगे।

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राजनीति नब्ज टटोलने की कोशिश

इस दौरान वे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों पर चर्चा के साथ ही जिला से लेकर बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे। इसके बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर में बाकी चार क्षेत्रों का भी इसी तरह से दौरा करने की तैयारी है।

भाजपा ने सांगठनिक दृष्टि से उत्तरप्रदेश को पश्चिमी उत्तरप्रदेश, काशी, बुंदेलखंड, ब्रज, अवध और गोरखपुर में बांट रखा है। सभी क्षेत्रों का दौरा पूरा करने के बाद अक्टूबर से बूथ स्तर पर भाजपा को बढ़त दिलाने की रणनीति पर काम शुरू होगा।

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क्या है भाजपा की रणनीति?

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटों में आई भारी कमी को देखते हुए उत्तर प्रदेश विधानचुनाव को आसान नहीं माना जा रहा है। 2014 में 71 और 2019 में 62 सीटें अकेले जीतने वाली भाजपा 2024 में 32 सीटों पर सिमट गई। इसी तरह 403 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा अकेले 2017 में 312 सीटें और 2022 में 255 सीटें में सीटें जीतने में सफल रही थी।

2027 में पुराने प्रदर्शन को दोहराने के लिए पश्चिम बंगाल की चुनावी रणनीति को उत्तरप्रदेश में भी आजमाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल को पांच क्षेत्रों में बांट कर अमित शाह ने पांच संगठन सचिवों और पांच वरिष्ठ नेताओं को इनकी जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके पहले बिहार विधानसभा और महाराष्ट्र विधानसभा में इसी रणनीति के सहारे ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही थी।

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