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अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी के चलते दोगुना हुआ बजट, जानें कब तक होगी शुरू

Published: Wed, 26 Aug 2026 08:46 AM (IST)

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत दोगुनी बढ़ गई है। इस ट्रेन का पहला हिस्सा 2027 में शुरू किया जा सकता है।

HighLights

  1. बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत ₹1.1 लाख करोड़ से ₹2.1 लाख करोड़ हुई।

  2. महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और मंजूरियों में देरी से लागत बढ़ी।

  3. जापान से ट्रेन सेट मिलने में हुई देरी भी एक वजह।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन की शुरुआत अब कुछ ही महीनों में होने वाली है। इस प्रोजेक्ट के 2030 में पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन कॉरिडोर के पहले हिस्से को अगस्त 2027 में चालू करने की योजना है।

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन की शुरुआती लागत का अनुमान 1.1 लाख करोड़ रुपये लगाया गया था। वहीं अब इसे संशोधित करके करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का खर्चा बढ़ा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 508 किलोमीटर लंबी हाई-स्पीड रेल लाइन की संशोधित लागत को मंजूरी दिलाने का प्रस्ताव मंगलवार, 25 अगस्त को कैबिनेट के सामने रखा गया था। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के फैसलों पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रेल मंत्रालय ने इस लागत के बढ़ने का मुख्य कारण महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण में लगा समय और जापान से ट्रेन सेट मिलने में हुई देरी बताई है।

देखा जाए तो अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन की अनुमानित लागत करीब दोगुनी हो गई है। 1.1 लाख करोड़ रुपये से 2.1 लाख करोड़ रुपये हो जाने से रेल मंत्रालय को अतिरिक्त फंड की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, यह अतिरिक्त फंड बजट से दिया जा सकता है।

इस प्रोजेक्ट के लिए अब तक 1.1 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) और बजट आवंटन से हुई है। उन्होंने कहा कि रेलवे ने बताया है कि हाई-स्पीड ट्रेनें भारत में बनाई जाएंगी और हर ट्रेन की लागत लगभग 390 करोड़ रुपये से 400 करोड़ रुपये होगी।

बुलेट ट्रेन की लागत बढ़ने के क्या हैं कारण?

जनवरी में, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने कहा था कि प्रोजेक्ट की लागत लगभग 83 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

जमीन अधिग्रहण में देरी, जरूरी मंजूरियां मिलने में देरी और ट्रेनों को अंतिम रूप देने में देरी समेत कई कारणों से इस प्रोजेक्ट में समय और लागत दोनों बढ़े हैं।

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