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खुद कभी नहीं पढ़ पाईं मांगी बाई, बच्चों के भविष्य के लिए दान कर दिए 15 लाख

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:52 PM (IST)

चित्तौड़गढ़ जिले की 80 वर्षीय मांगी बाई ने अपनी जीवनभर की पूंजी में से 15 लाख रुपए सरकारी विद्यालयों के ...और पढ़ें

चित्तौड़गढ़ जिले की 80 वर्षीय मांगी बाई ने बच्चों के भविष्य के लिए दान कर दिए 15 लाख

चित्तौड़गढ़ जिले की 80 वर्षीय मांगी बाई ने बच्चों के भविष्य के लिए दान कर दिए 15 लाख

HighLights

  1. सरकारी स्कूलों के विकास के लिए जीवनभर की पूंजी सौंपी, जिला प्रशासन ने किया सम्मान

  2. स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों ने मांगी बाई की दरियादिली की सराहना की

जागरण संवाददाता, उदयपुर। पढ़ने-लिखने का अवसर खुद नहीं मिला, लेकिन राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की मांगी बाई आहीर ने आने वाली पीढ़ी को शिक्षा से वंचित न रहने देने का संकल्प लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है।

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चित्तौड़गढ़ जिले की 80 वर्षीय मांगी बाई ने अपनी जीवनभर की पूंजी में से 15 लाख रुपए सरकारी विद्यालयों के विकास और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दान किए हैं।

उनके इस कदम ने शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल कायम की है। मांगी बाई के इस अनुकरणीय योगदान पर जिला प्रशासन की ओर से उनका विशेष सम्मान किया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि उनका योगदान सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के विकास और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में उपयोगी साबित होगा। साथ ही यह पहल समाज के अन्य लोगों को भी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रेरित करेगी।

स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों ने मांगी बाई की दरियादिली की सराहना की। उनका कहना है कि स्वयं निरक्षर होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए बच्चों के भविष्य के लिए इतनी बड़ी राशि दान की है।

मांगी बाई का यह प्रयास बताता है कि शिक्षा की रोशनी फैलाने के लिए केवल पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील सोच और सेवा की भावना भी जरूरी है।