Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    36 मिनट में 7 विधेयक पारित: मानसून सत्र में कई विधेयक पेश हुए, लेकिन प्रश्नकाल नहीं हुआ

    Updated: Wed, 12 Aug 2026 07:38 AM (IST)

    दिल्ली में परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्ष के हंगामे से घिरा संसद का मानसून सत्र विधायी एजेंडे के ...और पढ़ें

    36 मिनट में 7 विधेयक पारित: मानसून सत्र में कई विधेयक पेश हुए (फोटो- एएनआई)

    36 मिनट में 7 विधेयक पारित: मानसून सत्र में कई विधेयक पेश हुए (फोटो- एएनआई)

    HighLights

    1. सरकार ने इस सत्र में अब तक 19 बिल पारित करा लिए हैं

    2. लोकसभा ने 15 दिनों में सिर्फ 15 घंटे 36 मिनट ही काम किया

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र काफी हंगामे भरा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच लगातार गतिरोध होता रहा है।

    हालांकि दिल्ली में परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्ष के हंगामे से घिरा संसद का मानसून सत्र विधायी एजेंडे के लिहाज से पूरी तरह व्यर्थ नहीं गया।

    सरकार ने इस सत्र में अब तक 19 बिल पारित करा लिए हैं, जबकि सत्र खत्म होने में अभी दो दिन बाकी हैं। इन सभी बिलों को बिना किसी चर्चा के पारित किया गया।

    एक मौके पर तो महज 36 मिनट में 7 बिल पास हो गए, यानी औसतन हर पांच मिनट में एक बिल। कुछ बिलों में संशोधन प्रस्तावित होने के कारण थोड़ा ज्यादा समय लगा।

    लोकसभा ने 15 दिनों में सिर्फ 15 घंटे 36 मिनट ही काम किया, जबकि राज्यसभा ने 24 घंटे 21 मिनट काम किया। अगर रोजाना छह घंटे की कार्यवाही मानें तो 15 दिनों में 90 घंटे काम होना चाहिए था, लेकिन हंगामे के चलते यह आंकड़ा काफी कम रहा।

    सत्र में सबसे ज्यादा प्रभावित रहा प्रश्न काल, जो पूरी तरह नहीं हो पाया। सांसदों को सवाल पूछने का मौका ही नहीं मिला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार इस मुद्दे पर चिंता जताई है।

    सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि रही सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, जिस पर लोकसभा में 11 घंटे और राज्यसभा में साढ़े सात घंटे से ज्यादा चर्चा हुई।

    शुरुआत में विपक्ष नारेबाजी कर रहा था, लेकिन बहुमत के बल पर बिल पास होते देख उन्होंने वॉकआउट की रणनीति अपना ली। पिछले दो दिनों से राज्यसभा में विपक्ष लगातार वॉकआउट कर रहा है। एफसीआरए और परिसीमन जैसे विवादास्पद बिल अभी लंबित हैं, लेकिन सरकार ने बाकी विधायी एजेंडा बहुमत के दम पर पूरा कर लिया।