Su-57 जेट, न्यूक्लियर पावर प्लांट और अमेरिकी प्रतिबंध... PM मोदी-पुतिन के बीच और किन-किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें व्यापार, आर्थिक सहयोग, Su-57 जेट और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर चर्चा होगी।

पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच होगी द्विपक्षीय बैठक। (फाइल फोटो।)
HighLights
मोदी-पुतिन बैठक: व्यापार, आर्थिक सहयोग पर मुख्य चर्चा।
Su-57 जेट, नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर भी होगी बात।
ब्रिक्स में वित्तीय सहयोग, राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग पर जोर।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है, जिसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग पर मुख्य रूप से चर्चा होने की उम्मीद है। इस बात की जानकारी क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दी।
रूस ने यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रयासों में भारत के योगदान देने की इच्छा का भी स्वागत किया। 12 सितंबर से दिल्ली में शुरु होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन भारत आ रहे हैं।
क्रेमलिन के प्रवक्ता ने क्या कहा?
इस दौरे से पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का मौका देगी। उन्होंने शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए भारत को सफलता की शुभकामनाएं भी दीं।
पेस्कोव ने कहा, "कुछ ही दिनों में राष्ट्रपति पुतिन भारत का दौरा शुरू करेंगे। भारत और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी व्यक्तिगत संबंध हैं। उनके रिश्ते बहुत व्यावहारिक हैं और वे इतने ईमानदार हैं कि हमारे एजेंडे और द्विपक्षीय संबंधों के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुलकर और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं। जाहिर है, इससे हमारे सहयोग के लिए नए रास्ते खुलते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हमें पूरा भरोसा है कि यह समिट सफल होगी। रूस, ब्रिक्स के साथ हमारे सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों यानी पॉलिसी और सिक्योरिटी, इकॉनमी और फाइनेंस और कल्चरल और मानवीय मामलों को और आगे बढ़ाने में अपना पूरा योगदान दे रहा है। इसलिए, हम ब्रिक्स के अलग-अलग फॉर्मेट में नए देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन कर रहे हैं।"
एजेंडे में और क्या है?
पेस्कोव ने कहा कि रूस भारत के साथ नए न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने पर बातचीत का इंतजार कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को Su-57 फाइटर एयरक्राफ्ट बेचना भी एजेंडे में शामिल है। क्रेमलिन के प्रवक्ता ने फाइनेंशियल सेक्टर में सहयोग की जरूरत पर जोर दिया और आरोप लगाया कि कुछ देश अपनी करेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं।
पेस्कोव ने कहा, "ब्रिक्स के फाइनेंशियल क्षेत्र में सहयोग बहुत अहम है। हाल ही में रूस ने ब्रिक्स देशों के साथ होने वाले सभी पेमेंट और ट्रांजैक्शन में से 90 प्रतिशत अपनी राष्ट्रीय करेंसी में करने का स्तर हासिल कर लिया है, जो बहुत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने आगे कहा, "ऐसा इसलिए नहीं है कि हम डी-डॉलरलाइजेशन से छुटकारा पाना चाहते हैं। इसके उलट, हम पेमेंट के हर स्वीकार्य तरीके के लिए तैयार हैं लेकिन आप जानते हैं कि कुछ देश अपनी राष्ट्रीय करेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। वे अपनी राष्ट्रीय करेंसी के आधार पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। इसलिए, अगर वे हमें अपनी करेंसी का इस्तेमाल नहीं करने देते तो हम अपनी करेंसी का इस्तेमाल करते हैं।"
बता दें कि भारत 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। उभरती हुई बड़ी बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों का यह समूह वैश्विक मामलों में अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है।
