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SIR के पक्ष में 42 रिटायर्ड जजों का देश के नाम ओपन लेटर, विपक्ष के प्रदर्शन को बताया लोकतंत्र पर हमला

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:35 PM (GMT+05:30)Updated: Thu, 08 Oct 2026 09:27 PM (GMT+05:30)

42 पूर्व जजों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने चुनाव आयोग का समर्थन करते हुए विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को निराधार बताया।

42 रिटायर्ड जजों ने संवैधानिक संस्थाओं के बचाव में खुला पत्र लिखा (जागरण ग्राफिक्स)

42 रिटायर्ड जजों ने संवैधानिक संस्थाओं के बचाव में खुला पत्र लिखा (जागरण ग्राफिक्स)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कई पूर्व जज और संवैधानिक पदों पर रहे सेवानिवृत्त अधिकारी आयोग के समर्थन में आए हैं।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधानिकता को अपने तर्कों से पुष्ट करते हुए उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमलों पर चिंता जताई।

देशवासियों के नाम लिखे खुले पत्र में हर भारतीय से इन संस्थाओं के समर्थन व बचाव में आगे आने का आह्नान करते हुए उन्होंने चेताया कि वोट के विरुद्ध नैरेटिव से अशांति की शुरुआत होती है।

फिर अराजक और चरमपंथी तत्व जगह ले लेते हैं। कुछ तो देश में ही होते हैं, कुछ को सीमापार से शह मिलती है। इसलिए लोकतंत्र में जनता का भरोसा बनाए रखने की जिम्मेदारी सबकी है।

संवैधानिक संस्थाओं पर हमला देश के लिए चिंताजनक

देश के 42 पूर्व जजों और सेवानिवृत्त अधिकारियों ने पत्र में सबसे पहले स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी से लेना-देना नहीं है। वे इसलिए लिख रहे हैं, क्योंकि अब चुप रहना कोई तटस्थ विकल्प नहीं है।

भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हो रहे हमलों के केंद्र में चुनाव आयोग है। उच्च न्यायपालिका व कानूनी संस्थाएं भी इससे अछूती नहीं हैं।

लगता है कि यह राजनीतिक हितों से प्रेरित सोची-समझी मुहिम है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अस्थिर करने के खतरनाक नतीजों की चिंता नहीं की गई है। संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बदनाम करना नहीं।

अब सार्वजनिक मंचों से संवैधानिक अधिकारियों को चोर, कठपुतली और समझौता करने वाला कहा जा रहा है। चुनाव अधिकारियों के नाम उजागर किए जाते हैं, उन्हें शर्मिंदा किया जाता है और सत्ता बदलने पर प्रतिशोध की धमकी दी जाती है।

विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को लोकतंत्र पर हमला बताया

उन्होंने कहा कि किसी भी अदालत ने इन आरोपों को सही नहीं पाया। वोट चोरी के आरोप प्रेस कान्फ्रेंस में लगाए जाते हैं और जब आयोग शपथ-पत्र मांगता है, तो कोई नहीं देता। जिस पार्टी ने पांच दशकों से ज्यादा देश पर राज किया, वही दावा करती है कि उसके बनाए सिस्टम में धांधली हुई है।

चुनिंदा मामलों में मुकदमेबाजी का लंबा इतिहास रखने वाले कार्यकर्ता संगठन संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध इन दावों को कानूनी रूप देने की कोशिश करते हैं।

जब न्यायालय में फैसला उनके हित में न हो, तो जहरीले बयान दिए जाते हैं। एसआइआर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख कर उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था ने बार-बार शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित किया है।

केंद्र और राज्यों में सरकारें बदली हैं। विपक्षी दलों ने भी कई चुनाव जीते हैं। भरोसे को लोकतंत्र की असल पूंजी बताते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि चुनाव लड़ें, उन्हें गलत न ठहराएं। अपनी शिकायतें सुबूतों के साथ आयोग और अदालतों के सामने रखें। आम नागरिक भी पहले तथ्यों की पुष्टि करें।

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