आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द को गढ़ने वाले कौन थे जॉन मैकार्थी? पढ़ाई के दौरान आया था एआई का विचार
जॉन मैकार्थी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक कहा जाता है। उन्होंने ही पहली बार साल 1955 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द गढ़ा था।

कौन थे जॉन मैकार्थी?
HighLights
एआई के जनक जॉन मैकार्थी।
गणित और विज्ञान में थी सबसे ज्यादा रुचि।
लिस्प प्रोग्रामिंग भाषा का भी किया विकास।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। आज जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है। उस शब्द को जॉन मैकार्थी ने साल 1755 में ही गढ़ दिया था। शिक्षा हासिल करने के दौरान ही जॉन मैकार्थी के मन में यह विचार गहराने लगा था कि क्या वास्तव में मशीने इंसानों की तरह सोच सकती है। बता दें, जॉन मैकार्थी का जन्म आज ही के दिन 04 सितंबर, 1927 में हुआ था। जॉन मैकार्थी को पूरी दुनिया में एआई के जनक के रूप में जाना जाता है। एआई की दुनिया में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
गणित व विज्ञान में विशेष रुचि
जॉन मैकार्थी का जन्म आज ही के दिन 04 सितंबर, 1927 में अमेरिका के बोस्टन मैसाचुसेट्स में हुआ था। उनके जन्म के बाद परिवार कैलिफोर्निया चला गया और उनका बचपन लॉस एंजिल्स में ही बीता। जॉन मैकार्थी की विज्ञान एवं गणित विषय में सबसे ज्यादा रुचि थी। मैकार्थी ने साल 1948 में गणित विषय में अमेरिका के कैलटेक इंस्टीट्यूट से स्नातक की डिग्री हासिल की।इसके बाद उन्होंने साल 1952 में अपनी पीएचडी पूरी की।
पहली बार यहां से आया AI का विचार
जॉन मैकार्थी कंप्यूटर और संज्ञानात्मक विज्ञान के एक प्रसिद्ध अमेरिकी वैज्ञानिक थे। मशीनों को इंसानों जैसा दिमाग देने का विचार सबसे पहले जॉन मैकार्थी को ही आया था। शिक्षा हासिल करने के दौरान ही उनके मन में यह सवाल आ गया था कि क्या मशीने इंसानों की तरह सोचने एवं समस्या को हल कर सकती है। बता दें, साल 1955 में पहली बार मैकार्थी ने ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का निर्माण किया था। इसके बाद उन्होंने अपने वैज्ञानिक साथियों के साथ मिलकर इस विषय पर गहराई से शोध करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया और पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का उपयोग किया।
एआई की दिशा में किया काम
मैकार्थी ने अपने वैज्ञानिक साथियों के साथ मिलकर ऐसी मशीन की कल्पना की जो अपने मौजूदा ज्ञान का इस्तेमाल करके किसी भी समस्या को आसानी से हल कर सकती है। इस समय कंप्यूटर बहुत ज्यादा महंगे थे। इसलिए इस समस्या को सुलझाने के लिए मैकार्थी ने एक ऐसी व्यवस्था के बारे में विचार किया, जिसमें एक ही कंप्यूटर का उपयोग कई कई सारे लोग आसानी से कर सकते थे।
लिस्प प्रोग्रामिंग भाषा का विकास
मैकार्थी ने एआई के साथ-साथ लिस्प प्रोग्रामिंग भाषा का भी विकास किया था। यह भाषा एआई अनुसंधान के लिए बेहद ही उपयोगी थी। इस भाषा के विकास से प्रतीकों, सूचनाओं और संरचनाओं के साथ काम करना बेहद ही आसान था। मैकार्थी के इस उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कंप्यूटर विज्ञान का सर्वोच्च सम्मान एसीएम, एएम टर्निंग अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके बाद साल 1985 में उन्हें आईईई कंप्यूटर सोसायटी पायोनियर अवॉर्ड मिला। साल 1988 में उन्हें क्योटो प्राइज और 1990 में उन्हें यूएस नेशन मेडल ऑफ साइंस अवॉर्ड मिला।
