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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 03, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बेसिक वेतन 6,500 से ऊपर होने पर पीएफ कटौती जरूरी नहीं

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Published: Tue, 03 Jun 2014 12:12 PM (IST)Updated: Tue, 03 Jun 2014 01:00 PM (IST)

किसी कर्मचारी का मूल वेतन अगर 6,500 रुपये से अधिक है, तो अब उसके लिए प्रोविडेंट फंड [पीएफ] में राशि ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। किसी कर्मचारी का मूल वेतन अगर 6,500 रुपये से अधिक है, तो अब उसके लिए प्रोविडेंट फंड [पीएफ] में राशि जमा करना जरूरी नहीं होगा। ऐसा होने के बाद यह कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह कंपनी में पीएफ की योजना को अपनाएगा या फिर पीएफ की जगह अपनी राशि कहीं और निवेश करेगा।

इस संबंध में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन [ईपीएफओ] ने 27 मई को सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 6,500 रुपये तक है उन्हें पीएफ में 12 फीसदी योगदान करना जरूरी होगा। कंपनी को भी उसी अनुपात में राशि देनी होगी। लेकिन जिनका मूल वेतन 6,500 रुपये से अधिक है, उनके पास यह विकल्प होगा कि वे पीएफ में अपनी राशि दें या न दें।

क्या है मामला :

जिनका मूल वेतन अधिक है क्या कंपनियां उन्हें पीएफ में पैसे देने के लिए दबाव डाल सकती हैं? इसे लेकर मराठवाड़ा ग्रामीण बैंक कर्मचारी और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा था कि जिन कर्मचारियों का मूल वेतन अधिक है, उन पर पीएफ के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोई भी कंपनी पीएफ के तहत कर्मचारियों को देने वाली सुविधाओं और फायदों को कम नहीं कर सकती।

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