यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 23, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नारी सशक्तिकरण: मिटा दी चूल्हे-चौके की 'लक्ष्मण रेखा'
महिलाओं ने सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए समाज के गंभीर मुद्दों पर विचार रखें। मंच से उद्घोष किया गया कि गुर्जर महिलाएं अब घूंघट नहीं करेंगीं। ...और पढ़ें

वर्षों से घूंघट के पीछे रहीं गुर्जर महिलाओं को सशक्त बनाने की बयार बहने लगी है। सोच में यह बदलाव बुधवार को ग्रेटर नोएडा में हुए अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस में साफ नजर आया। पहली बार गुर्जर महिलाएं इतनी अधिक संख्या में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में न केवल शामिल हुईं, बल्कि मंच भी संभाला। महिलाओं ने सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए समाज के गंभीर मुद्दों पर विचार रखें। विभिन्न क्षेत्र में मुकाम हासिल कर चुकीं महिला गुर्जर प्रतिभाएं मंच पर प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर उपस्थित थीं। मंच से उद्घोष किया गया कि गुर्जर महिलाएं अब घूंघट नहीं करेंगीं। वहां मौजूद सभी महिलाओं ने जोश भरे अंदाज में हाथ उठाकर इसका समर्थन किया।
78 ईसवी 22 मार्च को गुर्जर सम्राट कनिष्क का राज्यरोहण हुआ था। इस दिन को गुर्जर समाज हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस के रूप में मनाते हैं। ग्रेटर नोएडा में पहली बार इसका आयोजन किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल एवं गुजरात से गुर्जर शामिल होने पहुंचे। सभी ने एकजुट होकर महिलाओं की दिशा दशा सुधारने का संकल्प लिया। बेटियों की शिक्षा, समान अधिकार, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अवसर देने के साथ ही भरपूर सुविधाएं देने पर सहमति जताई।
यह भी निर्णय लिया गया कि गुर्जर अब अपनी बेटियों को नौकरियों में भेजने से परहेज नहीं करेंगे। आइआरएस अधिकारी सुनीता बैंसला, एवरेस्ट फतह कर चुकी सुनीता गुर्जर, कॉमनवेल्थ खेलों में परचम लहरा चुकी बबीता नागर, जेएनयू की छात्र संघ उपाध्यक्ष प्रियंका छाबड़ी व यूनेस्को द्वारा यूथ आइकान अवार्ड से नवाजी गई महामेधा नागर को समाज के सामने रोल मॉडल के तौर पर पेश किया गया।
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