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    'वंचितों को मुख्यधारा में लाना जरूरी, तभी विश्वगुरु बनेगा भारत', बोले मोहन भागवत

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 11:53 PM (IST)

    मोहन भागवत ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए वंचितों और हाशिए पर पड़े समुदायों को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है। ...और पढ़ें

    वंचितों को मुख्यधारा में लाना जरूरी।

    वंचितों को मुख्यधारा में लाना जरूरी।

    HighLights

    1. मोहन भागवत ने बुलढाणा में पारधी समुदाय के कार्यक्रम में भाग लिया।

    2. भारत को विश्वगुरु बनाने वंचितों को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है।

    3. आरएसएस प्रमुख ने समाज को एकजुट होने का आह्वान किया।

    डिजिटल डेस्क, बुलढाणा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि देश को असल मायने में ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए वंचितों और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है।

    महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में पारधी समुदाय के आवासीय विद्यालय में खेल मैदानों का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समुदाय को हम ‘भटके-विमुक्त’ (घुमंतू जनजातियां) समुदाय कहते हैं, वह कभी ज्ञान का भंडार था। घुमंतू समुदाय का हर व्यक्ति अपना है। इसलिए इन लोगों के लिए कुछ करना मेरा कर्तव्य है ताकि उनका जीवन बेहतर हो सके।

    भागवत ने कहा, घुमंतू समुदाय के लोग निस्वार्थ भाव से ज्ञान बांटने बाहर जाते थे, लेकिन समय के साथ वे हाशिए पर चले गए। ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण पारधी समुदाय को ‘अपराधी जनजाति’ घोषित कर दिया गया।

    भागवत ने कहा, हम भारत को विश्वगुरु बनाना चाहते हैं, तो समाज के इन हाशिए पर पड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना होगा। इस लक्ष्य के लिए समाज को एकजुट होना होगा।

    उन्होंने कहा कि भारतीय समाज कभी पूरी तरह संगठित था, लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों की गुलामी के कारण उसमें बिखराव आ गया। भागवत ने यह भी कहा कि संघ कई वर्षों से पारधी समुदाय के विकास के लिए काम कर रहा है।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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