'SIR ड्राफ्ट में नाम न होने का मतलब लिस्ट से हटाना नहीं है', बॉम्बे हाई कोर्ट से चुनाव आयोग ने कहा
चुनाव आयोग ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न होने का मतलब लिस्ट से हटाना नहीं है।

SIR ड्राफ्ट में नाम न होने का मतलब लिस्ट से हटाना नहीं है।
HighLights
ECI ने बॉम्बे हाई कोर्ट को वोटर लिस्ट पर स्पष्टीकरण दिया।
SIR ड्राफ्ट में नाम न होना हटाने का मतलब नहीं।
कोर्ट ने गोवा निवासी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। चुनाव आयोग ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में किसी वोटर का नाम न होने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम लिस्ट से हटा दिया गया है।
कोर्ट ने गोवा के एक निवासी की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। ECI की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट आशुतोष कुंभकोनी ने गोवा बेंच को बताया कि SIR में वोटर लिस्ट को नए सिरे से तैयार किया जाता है, जबकि स्पेशल समरी रिविजन (SSR) में पहले से मौजूद लिस्ट को अपडेट किया जाता है।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमिक जामसांडेकर की बेंच ने मामले में दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह सुनवाई SIR प्रक्रिया और ECI के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुई।
उत्तरी गोवा जिले के सेंट क्रूज निर्वाचन क्षेत्र में रहने वाले परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच सदस्यों ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि रिविजन प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से उनके नाम हटा दिए गए थे।
ECI ने SIR प्रक्रिया के बारे में दिया स्पष्टीकरण
कुंभकोनी ने कहा कि SIR एक व्यापक और नई प्रक्रिया है जिसमें वोटर लिस्ट को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया जाता है। इसके विपरीत, समरी रिवीजन में तय प्रक्रिया के जरिए मिली जानकारी के आधार पर पहले से मौजूद वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है।
ECI के वकील ने कहा कि SIR ड्राफ्ट लिस्ट में नाम न होने से मतलब यह नहीं है कि नाम हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि नए सिरे से तैयार की जा रही ड्राफ्ट लिस्ट में किसी नाम का न होना तकनीकी रूप से नाम हटाना नहीं कहा जा सकता। वकील ने आगे तर्क दिया कि याचिकाकर्ता कथित तौर पर SIR से पहले वोटर लिस्ट में दर्ज पते पर पिछले 8 से 10 सालों से नहीं रह रहा था।
उन्होंने यह भी रहा कि रिविजन प्रक्रिया शुरू होने से पहले याचिकाकर्ता ने पता बदलने के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। कुंभकोनी ने कोर्ट से कहा कि असल में माई लॉर्ड, यह एक ऐसा मामला है दो SIR की प्रभावशीलता को दिखाई है।
