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IAS संतोष वर्मा के खिलाफ NSA कार्रवाई की मांग हाईकोर्ट ने ठुकराई, जनहित याचिका खारिज

Published: Mon, 29 Jun 2026 04:19 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट ...और पढ़ें

आईएएस संतोष वर्मा को हाईकोर्ट से राहत।

आईएएस संतोष वर्मा को हाईकोर्ट से राहत।

HighLights

  1. आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ जनहित याचिका खारिज।

  2. आदेश में कहा- न्यायालय जांच एजेंसी या नीति निर्माता नहीं।

  3. एनएसए, विभागीय कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी का विषय।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी चर्चित बयान के आधार पर न्यायालय हर प्रकार की प्रशासनिक या दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश नहीं दे सकता।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्यायपालिका की भूमिका जांच एजेंसी, अनुशासनात्मक प्राधिकारी या नीति निर्माता की नहीं है। जहां कानून के तहत कार्रवाई की आवश्यकता होगी, वहां संबंधित सक्षम प्राधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेगा।

बयान को लेकर दायर हुई थी याचिका

यह जनहित याचिका जबलपुर के अधिवक्ता अभिषेक दुबे ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि 23 नवंबर 2025 को संतोष वर्मा ने ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक और जातिगत टिप्पणी की थी, जिससे सामाजिक वैमनस्य फैलने की आशंका उत्पन्न हुई।

याचिकाकर्ता ने संतोष वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई, अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई तथा ब्राह्मण समाज के कल्याण के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की थी।

एफआईआर दर्ज होने का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में एफआईआर पहले से दर्ज है, इसलिए दोबारा इस संबंध में कोई निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई करना पूरी तरह सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी का अधिकार क्षेत्र है और इस विषय में न्यायालय आदेश जारी नहीं कर सकता।

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विभागीय कार्रवाई और विशेष नीति की मांग भी ठुकराई

खंडपीठ ने विभागीय कार्रवाई संबंधी मांग भी अस्वीकार कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया है, इसलिए इस संबंध में कोई निर्देश देना उचित नहीं होगा।

इसके अलावा किसी एक समुदाय के लिए विशेष नीति या दिशा-निर्देश जारी करने की मांग को भी न्यायालय ने खारिज करते हुए कहा कि नीति निर्माण कार्यपालिका का विषय है, न्यायपालिका का नहीं। सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने जनहित याचिका निरस्त कर दी।