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तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के दोषी की फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदली; MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Wed, 02 Sep 2026 05:40 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शहडोल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी रामनारायण ढीमर की फांसी ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' नहीं मानते हुए बदली सजा।

  2. दोषी रामनारायण ढीमर को माफी का लाभ नहीं।

  3. पत्नी पिंकी व दोस्त राजकुमार हाई कोर्ट से बरी।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शहडोल जिले में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी रामनारायण ढीमर की फांसी की सजा को 25 वर्ष की कठोर उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस अवधि के दौरान दोषी को किसी भी तरह की माफी, सजा में छूट या समयपूर्व रिहाई का लाभ नहीं मिलेगा।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय बुढ़ार से प्राप्त डेथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। निचली अदालत ने 13 जनवरी 2026 को रामनारायण को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया था।

2023 में हुई थी बच्ची की हत्या

अभियोजन के अनुसार, 1 मार्च 2023 की रात शहडोल के खैरहा थाना क्षेत्र के ग्राम छिरहटी में आरोपित ने पड़ोस में रहने वाली तीन वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत ने उसे मृत्युदंड दिया था।

इसलिए बदली सजा

हाई कोर्ट ने सजा पर विचार करते हुए दोषी की उम्र, उसके पूर्व आपराधिक इतिहास और सुधार की संभावना को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि आरोपित की उम्र 32 वर्ष है और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। ऐसे में उसके सुधार और पुनर्वास की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में नहीं माना और मृत्युदंड को 25 वर्ष की उम्रकैद में बदल दिया।

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पत्नी और दोस्त बरी

इसी मामले में रामनारायण की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को निचली अदालत ने चार-चार वर्ष की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने दोनों के खिलाफ दी गई सजा को निरस्त करते हुए उन्हें बरी कर दिया।