पति की खोज में दर-दर भटकी पत्नी, कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई, तब पता लगा 8 माह पहले हो चुकी मौत... जबलपुर में हैरान करने वाला मामला
जबलपुर में एक महिला को अपने लापता पति की मौत की जानकारी आठ महीने बाद मिली। पति को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत के बाद अस्पताल ने ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वाली महिला को जबलपुर मेडिकल अस्पताल से लापता पति की मौत के बारे में आठ माह बाद पता चला। दरअसल, महिला ने अपने पति को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था, जहां से वह अगले ही दिन लापता हो गया था।
अस्पताल ने लावारिस मानकर दफनाया
इस बात का खुलासा तब हुआ, जब हाई कोर्ट में महिला की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उस व्यक्ति की मौत भर्ती होने के ठीक एक दिन बाद हो गई थी। अस्पताल ने उसे दफना दिया था, क्योंकि कोई भी उसके शव पर दावा करने नहीं आया था।
मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा था मामला
हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता प्रीति विश्वकर्मा ने अपने पति की पहचान उन कपड़ों से की, जो उसने अस्पताल में भर्ती होते समय पहन रखे थे। प्रीति ने पुलिस सखी ऐप पर अपने पति के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। गढ़ा पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया था। इसके साथ ही राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए जबलपुर के एसपी से रिपोर्ट तलब की थी।
कोर्ट की शरण ली, तब हुआ खुलासा
तमाम कोशिशों के बाद भी जब उसके पति का पता नहीं चला, तो वो हाई कोर्ट चली गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जबलपुर पुलिस को उसके लापता पति को ढूंढने और कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। जबलपुर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के पति अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में नहीं दिखे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जब तलाश शुरू की गई थी, तब अस्पताल में लापता पोस्टर लगाए गए थे।
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कोर्ट ने मामले का किया पटाक्षेप
यह मामला मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगा था। न्यायालय को राज्य के वकील ने मेडिकल में भर्ती मरीज की मौत के बारे में जानकारी प्रदान की। कोर्ट ने मामले का पटाक्षेप करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता मुआवजा मांगना चाहती है या इस बात की जांच की मांग करना चाहती है कि जब अस्पताल के मुर्दाघर में लाश लावारिस पड़ी थी, तो उसे अपने पति की मौत के बारे में क्यों नहीं बताया गया, तो वह अलग से याचिका दायर करने स्वतंत्र है।