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छिंदवाड़ा में सिस्टम की हकीकत: बीमार बहू को डोली में उठाया, 3 नदियां पार कर 6 घंटे बाद पहुंच सके अस्पताल

Published: Sun, 06 Sep 2026 04:36 PM (IST)

छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण एक नवविवाहिता को डोली में बैठाकर 6 घंटे ...और पढ़ें

बीमार बहू को डोली में ले जाते परिजन। (वीडियो ग्रैब)

बीमार बहू को डोली में ले जाते परिजन। (वीडियो ग्रैब)

HighLights

  1. छिंदवाड़ा में नवविवाहिता को डोली से अस्पताल पहुंचाया गया।

  2. सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली उजागर हुई।

  3. परिवार ने 6 घंटे में तीन उफनती नदियां पार कीं।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विकासखंड के दुर्गम आदिवासी अंचल में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। कुछ दिन पहले गोप के जामुन डोंगा मजरे में मरीज को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाने का मामला सामने आया था। अब शनिवार, 5 सितंबर को पील्हावाड़ी गांव की 22 वर्षीय नवविवाहिता को पेट में तेज दर्द होने पर स्वजनों ने डोली में बैठाकर जंगल और उफनती नदियों के बीच करीब छह घंटे का जोखिम भरा सफर तय किया।

पील्हावाड़ी निवासी कड्डे ढ़ीकू (22), पति राजू ढ़ीकू की शनिवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। पेट में तेज दर्द उठने के बाद परिवार के सामने उसे अस्पताल तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण स्वजनों ने डोली तैयार की और पैदल ही निकल पड़े।

दो नदियां पार कीं, तीसरी ने रोका रास्ता

बीमार बहू को डोली में लेकर उसके ससुर मन्नू ढ़ीकू गांव के ही चैतराम भोपा, बारेलाल भोपा, हीरो दर्शमा और सुकर लाल ढ़ीकू के साथ सुबह करीब 10 बजे रवाना हुए।

परिवार के मुताबिक पील्हावाड़ी से झालमऊ के बीच रास्ते में पड़ने वाली डोबरी डोह और दानी घाट नदी को किसी तरह पार किया गया। इसके बाद झालमऊ के पास रिंदों नदी ने मुश्किल और बढ़ा दी। नदी में पानी अधिक होने के कारण सीधा रास्ता पूरी तरह बंद था।

पहाड़ी पगडंडी होकर लंबा चक्कर

रास्ता बंद होने के बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। मरीज को डोली में लेकर पहाड़ के किनारे बनी पथरीली और दुर्गम जंगली पगडंडी से लंबा चक्कर लगाया गया। काफी मशक्कत के बाद परिवार कट्टा (बिचबेहरी) पहुंच सका।

यहां से स्वजनों ने अपने खर्च पर चौपहिया वाहन की व्यवस्था की और गोरख घाट के रास्ते मरीज को दमुआ लेकर पहुंचे।

छह घंटे बाद निजी क्लीनिक में मिला इलाज

परिवार करीब शाम चार बजे दमुआ पहुंचा। यहां नवविवाहिता को एक निजी चिकित्सक के क्लीनिक में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। पील्हावाड़ी से दमुआ तक पहुंचने में परिवार को करीब छह घंटे का समय लगा।

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सवालों के घेरे में स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था

यह घटना एक बार फिर जुन्नारदेव के दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करती है। गांवों तक पक्की सड़क और नदियों पर पुल-पुलिया नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए डोली, पैदल रास्तों और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क कनेक्टिविटी पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पील्हावाड़ी जैसे गांवों की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है।

मुझे इस बारे में जानकारी मिली है। हम लगातार सड़क बनवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार सौतेला रवैया अपना रही है।
- सुनील उईके, विधायक जुन्नारदेव