बालाघाट में मवेशी चराने गए किसान की बाघ के हमले में मौत, गाय-बछड़े का भी किया शिकार; ग्रामीणों में दहशत
बालाघाट के खैरलांजी वन परिक्षेत्र में बाघ के हमले से एक किसान देवकराम वाघमारे की मौत हो गई, जहां उसकी गाय और बछड़े का शव भी मिला। घटना के बाद ग्रामीणो ...और पढ़ें

बाघ के हमले में किसान की मौत।
HighLights
बालाघाट में बाघ के हमले से किसान की मौत।
बाघ ने किसान के मवेशियों को भी बनाया शिकार।
वन विभाग ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दी।
डिजिटल डेस्क, बालाघाट। दक्षिण वन मंडल बालाघाट के खैरलांजी वन परिक्षेत्र में बाघ के हमले से एक किसान की मौत का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत मिरगपुर के पांढरवानी स्थित सतीटोला से लगे जंगल में मवेशी चराने गए 50 वर्षीय किसान देवकराम पिता श्यामलाल वाघमारे का शव सोमवार सुबह खून से लथपथ हालत में मिला। घटनास्थल के पास एक गाय और उसके बछड़े के शव भी मिले हैं। मौके पर बाघ के पंजों के निशान और हमले के संकेत मिलने से ग्रामीणों में दहशत के साथ आक्रोश है।
घटना की सूचना मिलते ही कटंगी एसडीओ यशपाल मेहरा, खैरलांजी वन परिक्षेत्र अधिकारी डीसी वासनिक और तिरोड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए कटंगी स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया। वन विभाग ने मृतक के परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है।
गाय-बछड़े को चराने जंगल गए थे देवकराम
जानकारी के अनुसार देवकराम वाघमारे खेती-किसानी करते थे। रविवार 9 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे वे एक गाय और उसके बछड़े को चराने के लिए गांव से लगे जंगल की ओर गए थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। रात तक आसपास के इलाकों में खोजबीन के बावजूद देवकराम का कोई सुराग नहीं मिला।
सोमवार सुबह परिजन और ग्रामीण दोबारा जंगल की ओर पहुंचे। करीब सात बजे मोक्षधाम घाट से लगे घने जंगल में उन्हें पहले एक गाय और उसका बछड़ा मृत अवस्था में दिखाई दिया। कुछ दूरी पर देवकराम का शव भी मिला। उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। घटनास्थल के आसपास बाघ के पंजों के निशान और हमले के अन्य संकेत भी बताए जा रहे हैं।
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मवेशियों को बचाने पहुंचे किसान पर भी किया हमला?
ग्रामीणों का अनुमान है कि बाघ ने पहले गाय और उसके बछड़े पर हमला किया होगा। मवेशियों को बचाने के लिए देवकराम उनके पास पहुंचे होंगे और इसी दौरान बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि वन विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
मिरगपुर सरपंच दीपक देशमुख ने बताया कि देवकराम के देर शाम तक घर नहीं लौटने पर ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की थी। सुबह जंगल में उनका शव और मृत मवेशी मिले। इसके बाद वन विभाग और पुलिस को सूचना दी गई।
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गांव में बढ़ाई गई गश्त, अकेले जंगल न जाने की अपील
घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। ग्रामीणों को अकेले जंगल की ओर नहीं जाने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बाघ की मौजूदगी की आशंका के चलते वन अमला क्षेत्र में निगरानी कर रहा है।
सरपंच के मुताबिक वन विभाग ने तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता दी है। नियमानुसार 24 घंटे के भीतर आठ लाख रुपये तथा शासन स्तर से स्वीकृत 17 लाख रुपये की सहायता एक माह के भीतर दिए जाने की जानकारी दी गई है।
किसान की मौत के बाद गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाघ की सक्रियता को देखते हुए प्रभावी निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और मृतक परिवार को जल्द से जल्द पूरा मुआवजा दिलाने की मांग की है।
पांढरवानी के जंगल किनारे एक किसान मवेशी चराने गया था। जिसकी बाघ के हमले से मौत हो गई। दो मवेशी का भी बाघ ने शिकार किया है। परिजनों को तत्काल 50 हजार की सहायता राशि दी गई है।
डीसी वासनिक, वन परिक्षेत्र अधिकारी खैरलांजी।