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उज्जैन में अघोरी किन्नर ने जलती चिता से टुकड़ा निकालकर खाया, भड़का संत समाज; अघोर अखाड़े ने पुलिस से की शिकायत

Published: Tue, 01 Sep 2026 12:40 PM (IST)Updated: Tue, 01 Sep 2026 05:53 PM (IST)

उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पर एक किन्नर अघोरी द्वारा जलती चिता से टुकड़ा निकालकर खाने का वीडियो वायरल हुआ। ...और पढ़ें

जलती चिता के पास किन्नर काली उर्फ नंद गिरि। (वीडियो ग्रैब)

जलती चिता के पास किन्नर काली उर्फ नंद गिरि। (वीडियो ग्रैब)

HighLights

  1. किन्नर काली ने उज्जैन श्मशान घाट पर चिता से टुकड़ा खाया।

  2. वायरल वीडियो पर संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

  3. अघोर अखाड़े ने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की।

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट का एक आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित होने के बाद संत समाज में नाराजगी है। वीडियो में खुद को अघोरी बताने वाली किन्नर काली उर्फ नंद गिरि कथित रूप से जलती चिता के पास पहुंचकर धारदार हथियार से शव के साथ छेड़छाड़ करती दिखाई दे रही है।

इसके बाद वह चिता से एक टुकड़ा निकालकर उसे हाथ में लेकर फूंक मारती और फिर मुंह में डालती नजर आ रही है। वीडियो में वह इसे लेकर आपत्तिजनक और चुनौतीपूर्ण बातें भी कह रही है।

संत समाज ने दी तीखी प्रतिक्रिया

इस वीडियो के इंस्टाग्राम सहित अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने के बाद इसे लेकर आमजन और संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वीडियो में काली उर्फ नंद गिरि कथित रूप से कहती सुनाई दे रही है कि यह बहुत टेस्टी है और वह लोगों के जीवन से भी इसी तरह खेलेगी। हालांकि वीडियो में वास्तव में खाया गया पदार्थ क्या था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अघोरी का कृत्य अमानवीय

इधर, अघोर अखाड़े के पीठाधीश्वर एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ ने पुलिस को शिकायत पत्र देकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि वीडियो में वास्तविक मानव शव के साथ छेड़छाड़ की गई है, तो यह गंभीर और अमानवीय कृत्य है।

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'अघोर साधना प्रचार या सनसनी का माध्यम नहीं'

बाबा विष्णुनाथ ने कहा कि अघोर साधना कठोर अनुशासन और गुरु-परंपरा पर आधारित आध्यात्मिक साधना है। इसे लाइक और व्यूज के लिए सनसनी फैलाने का माध्यम बनाना अघोर परंपरा और श्मशान की मर्यादा के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से सनातन और अघोर परंपरा की छवि प्रभावित होती है।