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इंदौर अग्निकांड : धुएं में घुटती सांसें, हिम्मत से लड़ता एक पिता... अपनों को बचाते-बचाते अपनी जिंदगी कर दी स्वाहा

Updated: Thu, 19 Mar 2026 01:04 AM (IST)

इंदौर अग्निकांड में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया ने बहादुरी से अपने परिवार को बचाया, लेकिन दूसरों को बचाने के प्रयास में अपनी जान गंवा दी। कार चार्जिंग से लगी आग में आठ लोगों की मौत हो गई।

इंदौर अग्निकांड में जलकर स्वाहा हुईं एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां।

इंदौर अग्निकांड में जलकर स्वाहा हुईं एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां।

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, इंदौर। आग की लपटें जब घर को निगल रही थीं, उस वक्त हर कोई अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में था। लेकिन इस अफरा-तफरी में भी रबर कारोबारी मनोज पुगलिया ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी पत्नी सुनीता और बेटों— सौरभ, सौमिल और हर्षित को किसी तरह पहली मंजिल तक पहुंचाया।

पत्नी ने हाथ पकड़कर रोकना चाहा, लेकिन मनोज ने अपनों को सुरक्षित जगह पर छोड़कर फिर आग में घिरे बाकी लोगों को बचाने के लिए कदम बढ़ा दिए।

तेज धुआं, जलती लपटें और बंद रास्ते… आखिरकार वही साहस उनकी जान पर भारी पड़ गया। घुटन और धुएं के बीच मनोज बेहोश होकर गिर पड़े—और फिर कभी उठ नहीं सके।

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मंत्री-विधायक मौके पर पहुंचे

कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट,विधायक महेंद्र हार्डिया और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मौके पर आ गए थे। पुलिस आयुक्त(एडीजी) संतोष कुमारसिंह ने घटना की जानकारी दी और बताया कि हादसा कार चार्जिंग के कारण हुआ है। सौरभ ने कहा- फायर ब्रिगेड ने आने में देरी कर दी। मैं मदद मांग रहा था। उन्हें बताया कि सिमरन(पत्नी) और पापा अंदर ही है। मगर उन्होंने मुझे अनसुना कर दिया।

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तेजी से भड़की आग

मनोज के घर के सामने महावीर रिजेंसी (मल्टी) है। अर्पित जैन और अपूर्व जैन ने सबसे पहले आग की लपटे देखी और डायल-112 पर कॉल लगाया। बाल्टी भर कर पानी डाला, पर लपटे पहली मंजिल तक चली गई। पानी के पाइप ने भी काम नहीं किया। अर्पित के अनुसार करीब पौन घंटे बाद फायरकर्मी पहुंचे। पानी के टैंकर भी कम पड़ गए और मनोज का घर आग का गोला बन गया।

दो माह पूर्व कराया था रिनोवेशन

धमाके की आवाज और तपन से 20 फीट दूर स्थित फ्लैट में भी रुकना मुश्किल हो गया था। शवों को निकालने के बाद फोरेंसिक अफसर और बिजली कंपनी के एक्सपर्ट भी जांच करने पहुंचे। विशेषज्ञों ने जले हुए तार,स्वीच बोर्ड और अन्य अवशेष बरामद किए है। दो महीने पूर्व ही मकान का रिनोवेशन कराया था। कईं लोग तो मकान की सुंदरता देख कर का फोटो खींच कर ले जाते थे।

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‘15 मिनट में सब जल जाएंगे…’ मदद की गुहार और सिस्टम की चुप्पी

पड़ोसी अपूर्व जैन और अर्पित जैन ने कॉल लगाया तो डायल-112 ने कहा फायर ब्रिगेड को आने में 15 मिनट लगेंगे। बाहर ब्लास्ट की आवाज सुनाई दे रही थी। रहवासियों ने गुजारिश की और ऑपरेटर से कहा कि मैडम 15 मिनट में तो जलकर खाक हो जाऐंगे। सिलिंडर में ब्लास्ट की आवाज सुनाई और कहा -आप फूटने की आवाज सुन लीजिए। इतना सुनने के बाद ऑपरेटर ने फोन रख दिया।

उस वक्त बिजली के पोल से आग बरस रही थी। फायर ब्रिगेड कंट्रोल रूम के अनुसार पहला काल तड़के 4:01 बजे आया था। 4:19 पर गांधी हॉल स्टेशन से पहली गाड़ी रवाना कर दी गई थी। इसके बाद मोती तबेला,लक्ष्मीबाई,जीएनटी मार्केट और सांवेर रोड़ से गाड़ियां पहुंचाई गई। करीब 1 लाख 70 हजार लीटर पानी से आग बुझाई है।

रहवासी नमित माहेश्वरी ने फायर ब्रिगेड पर लापरवाही का आरोप लगाया और एडिशनल डीसीपी जोन-1 मीना चौहान से कहा कि समय पर टैंकर आते तो जान बच सकती थी। रहवासी लगातार कॉल लगा रहे थे। कंट्रोल रूम से समय पर मदद नहीं मिली।

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केमिकल ड्रम और गैस सिलेंडर बने ‘बम’

जोन प्रभारी(बिजली) उमेश सिंह के अनुसार चिंगारी से सबसे पहले पर्दे ने आग पकड़ ली। इसके बाद घर का अन्य सामान जला। पूरे घर में फर्नीचर का काम करवा रखा था। इस कारण आग बढ़ती गई। केमिकल के ड्रम और गैस सिलिंडर भी रखे हुए थे। आग से धमाके के साथ सिलिंडर फट गए। इससे आग और खतरनाक हो गई। धमाकों ने न सिर्फ आग को भड़़काया, बल्कि मकान के कईं हिस्सों को क्षतिग्रस्त कर दिया। उमेशसिंह ने गाड़ी गरम होने और लोकल चार्जिंग का इस्तेमाल करने का अंदेशा भी जताया है। पोर्च में खड़े दोपहिया वाहन भी पूरी तरह जल गए है।

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चार साल बाद आई खुशखबरी, पल भर में पसरा मातम

हादसे की जैसे ही इंटरनेट मीडिया पर सूचना फैली, पुगलिया परिवार के रिश्तेदार,परिचित पहुंच गए। बाहर रहने वाले रिश्तेदारों ने एक दूसरे को कॉल लगाकर घटना बताई। नौकरानी सोनी ने कहा घर के सभी सदस्य खुश थे। उसने पूछा तो सुनीता ने कहा चार साल से जिस खबर का इंतजार था वो आई है। सुनीता बहू सिमरन के गर्भवती होने की बात कर रही थी। रहवासियों ने कहा मनोज मिलनसार थे। त्योंहार भी सबके साथ मिलाते थे। नवरात्र में गरबा और होली पर सामूहिक कार्यक्रम करते थे।

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कैंसरग्रस्त पिता का हौसला बढ़ाने आई थी बेटी, दोनों हार गए

मनोज मूलत: सादलगढ़(राजस्थान) के रहने वाले है। कारोबार के लिए वर्षों पूर्व घर छोड़ दिया था। कुछ सालों तक बिहार के किशनगंज में रहे और शादी के बाद इंदौर आ गए।

उनके साले विजय सेठिया कैंसर(फर्स्ट स्टेज)से जूझ रहे थे। 20 दिन पूर्व ऑपरेशन के लिए मनोज ने इंदौर बुला लिया था। विजय की बेटी रुचिका उर्फ टीनू अपने पिता का हालचाल जानने तीन दिन पहले ही किशनगंज से इंदौर पहुंची थी। साथ में थे उसके दो मासूम बेटी राशि और बेटा तनय। भतीजा कार्तिक भी साथ आ गया था।
अस्पताल में ऑपरेशन के बाद विजय का रेडिएशन का इलाज चल रहा था। मंगलवार को तीसरा रेडिएशन हुआ था। उसी रात घर में वे सब एक साथ थे और बहुत खुश थे। मंगलवार होने के कारण छोटी बहू सखी को मायके से नहीं ला पाए।

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किशनगंज में विजय सेठिया की बहू प्रियंका के पास बुधवार सुबह कोलकाता से एक रिश्तेदार का फोन आया और बताया कि इंदौर में आग लगी है। मनोज और विजय की मौत हो गई है। खबर सुनते ही घर में मातम पसर गया। बेटा विकास सेठिया और अन्य रिश्तेदार इंदौर के लिए रवाना हो गए।

विजय सेठिया किशनगंज के धर्मशाला रोड पर करीब 20 साल से किराए के मकान में रहकर कास्मेटिक का कारोबार करते थे। महावीर मार्ग पर नया मकान बन रहा था। सपना था कि कैंसर का इलाज हो जाए और घर पूरा हो जाए।

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बचने के लिए भागती रही गर्भवती बहू

घर की हाईटेक सिक्युरिटी भी जान बचाने में बाधक बन गई। रहवासी महेंद्र जैन और मनोज शर्मा के अनुसार बाहर आग की लपटें थी मगर छत सुरक्षित थी। पड़ोंसियों की छतों से मनोज के घर की छत पर चढ़े और परिवार को आवाज लगाई। छत पर लगे चैनल गेट पर ताला लगा था। किसी ने उनकी आवाज नहीं सुनी। आग बुझने और धुआं छंटने पर शवों को निकाला तो सिमरन और टीनू का शव चैनल के पास मिला। दोनों ने बचने की जद्दोजहद की, मगर उनका धुएं के कारण दम घुट चुका था। सिमरन के भाई जयेश के अनुसार चाबी ऊपर मंदिर के पास ही रखी थी। अफरा तफरी में किसी ने ध्यान नहीं दिया और सिमरन बाहर नहीं आ पाई।

घर में मिलें आठ सिलिंडर, सुरक्षा में बड़ी चूक

तिलक नगर टीआई मनीष लोधा के अनुसार घर से आठ गैस सिलिंडर मिलें है। इसमें तीन व्यवसायिक और पांच घरेलू उपयोग के है। कुछ सिलिंडर में ब्लास्ट भी हुआ है। एसी और फ्रीज के कम्प्रेसर भी धमाके के साथ फट चुके थे। टीआई के अनुसार घर में काफी ज्वलनशील सामग्री थी। संपत्ति की सुरक्षा की पूरा ध्यान रखा गया मगर आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। घर के आगे ही ट्रांसफार्मर लगा हुआ था। दरवाजों पर डबल लाक लगाया गया था। दो-दो दरवाजे लगाए गए थे। अग्निशमन यंत्र नहीं थे और धुआं निकलने की गुंजाइश नहीं थी।

एक घर, कई कहानियां… और राख में बदल गए सारे सपने

यह सिर्फ एक हादसा नहीं, कई अधूरी कहानियों का अंत है—
एक पिता का साहस, एक मां की खुशियां, एक बेटी की उम्मीदें, और एक परिवार के सपने… सब कुछ आग में समा गया।

इंदौर का यह अग्निकांड सिर्फ एक खबर नहीं, एक चेतावनी है—
लापरवाही, देरी और सुरक्षा की अनदेखी, कभी भी जिंदगी को राख में बदल सकती है।

टाइम लाइन

3:30 बजे आग की शुरुआत
4:01 पर फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
4:05 पर पुलिस का सेक्टर अधिकारी पहुंचा।
4:19 पर गांधी हॉल फायर स्टेशन से पहली गाड़ी भेजी।
5:00 बजे पहला शव निकाल कर एमवायएच भेजा गया।
1 लाख 70 हजार लीटर पानी से आग बुझी।
8 सदस्यों की मौत हुई।
4 को सुरक्षित निकाला गया।