धार भोजशाला के स्तंभ और कीर्तिमुख उकेर रहे इतिहास का सच, ASI सर्वे रिपोर्ट में उभरी मंदिर की झलक
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला में 106 मुख्य और 82 अर्ध स्तंभ हैं, जिन पर कीर्तिमुख की आकृतियां उकेरी गई हैं। इनमें चैत्य गवाक्ष व अन्य सजावटी तत्व भी मिले हैं, जो मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला की झलक दिखाते हैं।

धारा भोजशाला के स्तंभ पर उत्कीर्ण कीर्तिमुख की आकृति।

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डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के संरचनात्मक सर्वेक्षण में इसके भव्य स्थापत्य स्वरूप को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के अनुसार धार भोजशाला की पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्ध स्तंभों पर आधारित है। इनमें से अधिकांश स्तंभों पर कीर्तिमुख की आकृतियां अंकित हैं, हालांकि समय के प्रभाव से कई नक्काशियां धुंधली हो चुकी हैं।
याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार सर्वे में यह भी सामने आया है कि स्तंभ चूना पत्थर से निर्मित हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर दिखाई देता है। स्तंभों पर गोलाकार अभाकस, मोल्डिंग सजावट, अष्टकोणीय पट्ट, त्रिकोणीय आधार और उल्टे पत्तों की आकृतियां उकेरी गई हैं।
चैत्य गवाक्ष और अलंकरण के प्रमाण
भोजशाला के कई स्तंभों पर चारों दिशाओं में चैत्य गवाक्ष की नक्काशी भी मिली है, जो मध्यकालीन मंदिर वास्तु शैली का प्रमुख तत्व है। निचले हिस्सों में कीर्तिमुख, पत्तियों और लताओं की नक्काशी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। कुछ स्तंभों में सॉकेट व खांचे भी मिले हैं, जो पूर्व में अन्य संरचनात्मक भागों के जुड़े होने का संकेत देते हैं।
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यह है कीर्तिमुख
कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की प्रमुख अलंकारिक आकृति है, जिसे सिंहमुख जैसे विकराल चेहरे के रूप में दर्शाया जाता है। इसे भगवान शिव से जुड़ा प्रतीक माना जाता है और मंदिरों के द्वार, शिखर व स्तंभों पर सुरक्षा और शक्ति के प्रतीक के रूप में अंकित किया जाता था।
ASI की रिपोर्ट ने भोजशाला की स्थापत्य विशेषताओं को लेकर बहस को नया आयाम दे दिया है। अब इस ऐतिहासिक संरचना के स्वरूप और मूल स्वरूप को लेकर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

