भोजशाला विवाद : MP हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की दलील- 'सवा सौ साल पहले सिद्ध हो गया था, यह मंदिर ही है'
धार भोजशाला के धार्मिक स्वरूप पर इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1902 के ASI सर्वे का हवाला देते हुए इसे मंदिर बताया। उन ...और पढ़ें

धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, इंदौर। प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को लगातार चौथे दिन सुनवाई हुई। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने आखिरी दौर का तर्क रखा।
ASI सर्वे का हवाला
उन्होंने कोर्ट को बताया कि लगभग सवा सौ साल पहले हुए सर्वे में सिद्ध हो चुका है कि धार भोजशाला सरस्वती मंदिर ही है। यह सर्वे वर्ष 1902 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने किया था। राजस्व रिकॉर्ड में भी यह जगह भोजशाला के रूप में दर्ज है। जैन ने लगभग एक घंटे तक एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा की।
24 घंटे पूजा की अनुमति की मांग
उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के आदेश में संशोधन होना चाहिए और याचिकाकर्ता को भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार दिया जाना चाहिए। गुरुवार को हुई सुनवाई के साथ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के तर्क पूरे हो गए हैं। शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में दूसरे याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से तर्क रखे जाएंगे।
दीवार-खंभों पर उत्कीर्ण चित्र, त्रिशूल का उल्लेख
गुरुवार दोपहर ठीक 2.30 बजे सुनवाई शुरू हुई। एडवोकेट जैन ने कोर्ट को बताया कि सवा सौ साल पहले यहां संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी। दीवारें, खंभों पर लिखी बातों से इसके मंदिर होने की पुष्टि होती है। इसके बाद हाल ही में कोर्ट के आदेश पर दोबारा सर्वे हुआ था, जो 98 दिन चला था। इसकी रिपोर्ट भी कोर्ट के रिकॉर्ड में है। इस सर्वे में भोजशाला में दीवार और खंभों पर भगवान गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, शेर, श्वान आदि के चित्र मिले हैं। मस्जिद में ये चिह्न नहीं बनाए जाते हैं। सर्वे में भोजशाला में त्रिशूल भी मिला है।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- 'मस्जिद पक्ष का शपथ पत्र ही दे रहा भोजशाला के मंदिर होने के प्रमाण'; MP हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की मजबूत दलील
कार्बन डेटिंग पद्धति से सर्वे
इस सर्वे में कार्बन डेटिंग पद्धति का उपयोग किया गया है। इससे सिद्ध हो रहा है कि भोजशाला का अस्तित्व मस्जिद से बहुत पहले से है। भोजशाला के पत्थरों को ही मस्जिद बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था।