त्विषा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्टों में विरोधाभास, मौत के कारण पर उठे सवाल
नोएडा की अभिनेत्री व मॉडल त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध मौत के मामले में एम्स भोपाल और एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्टों में विरोधाभास सामने आया है।

त्विषा शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्टों में विरोधाभास।
HighLights
एम्स भोपाल और दिल्ली की रिपोर्टों में विरोधाभास।
चोटों की प्रकृति और समय पर उठे सवाल।
सीबीआई ने दिल्ली एम्स की राय को आधार माना।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। नोएडा की अभिनेत्री व मॉडल त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। एम्स भोपाल और एम्स दिल्ली में कराई गई पोस्टमार्टम जांच की रिपोर्टों में विरोधाभास से मौत के कारण पर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्टों में मौत का कारण फांसी से हुई एस्फिक्सिया (दम घुटना) बताया गया है, जबकि, शरीर पर मिली चोटों की प्रकृति और उनके लगने के समय को लेकर दोनों रिपोर्ट में खासा अंतर है।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय के अनुसार, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर सात एंटी-मार्टम चोटें दर्ज थीं। इसके बाद 18 मई 2026 को एम्स भोपाल ने एसीपी मिसरोद डिवीजन को भेजे पत्र में इन चोटों से जुड़े सवालों के जवाब दिए। मेडिकल बोर्ड ने गर्दन पर मिले दो छोटे लाल घर्षणों को फांसी के दौरान लिगेचर के खिंचाव और घर्षण से संबंधित बताया।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि ये निशान नाखून या उंगलियों के दबाव जैसे नहीं थे। वहीं, एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर मौजूद चोटों को इंसीडेंटल ट्रांसपोर्टेशन इंज्यूरी के अनुरूप माना। बोर्ड ने शरीर पर हमला, हाथापाई या संघर्ष के संकेत देने वाली चोट होने से भी इनकार किया। इस तरह दोनों बोर्डों की राय में चोटों के समय और कारण को लेकर स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। बता दें कि 12 मई 2026 को त्विषा का शव फंदे पर लटकता मिला था।
सीबीआई के निष्कर्षों में दिल्ली बोर्ड की राय को आधार
दस्तावेजों के अनुसार, सीबीआई के अंतिम निष्कर्षों में एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की राय को प्रमुख आधार बनाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि एम्स भोपाल द्वारा चोटों को एंटी-मार्टम बताए जाने के बावजूद एम्स दिल्ली की अलग राय को क्यों स्वीकार किया गया। यह भी स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण है कि एम्स दिल्ली के बोर्ड ने शव की दोबारा प्रत्यक्ष जांच की थी या केवल तस्वीरों और पूर्व पोस्टमार्टम दस्तावेजों के आधार पर राय दी थी।
उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड में इन दोनों रायों के बीच अंतर का विज्ञानिक आधार पर स्पष्ट नहीं दिखाई देता। इसलिए मौत के कारण से अधिक चोटों की टाइमिंग और उनके संभावित कारण को लेकर सवाल बने हुए हैं।
