MP में लिव-इन में रहने वालों को कराना होगा रजिस्ट्रेशन, जस्टिस रंजना देसाई समिति ने CM को सौंपी UCC की रिपोर्ट
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा। जस्टिस रंजना देसाई समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप द ...और पढ़ें

लिव-इन रिलेशन (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
UCC विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में होगा पेश।
जस्टिस रंजना देसाई समिति ने मुख्यमंत्री को UCC रिपोर्ट सौंपी।
लिव-इन संबंधों का पंजीयन अनिवार्य, उल्लंघन पर होगी आपराधिक कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में 20 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इसे गुजरात के कानून की तरह तैयार किया गया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने यूसीसी की रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया।
इसमें अनुशंसा के साथ जन परामर्श के दो भाग रखे गए हैं। वहीं, विधेयक का प्रारूप भी समिति ने तैयार कर दिया है। इसमें लिव इन संबंधों को लेकर कई प्रावधान किए गए हैं। इसका पंजीयन अनिवार्य किया गया है। यदि कोई पंजीयन नहीं कराता है और लिव इन में रहता है तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा। लिव इन से यदि कोई अलग होना चाहता है तो उसे रजिस्ट्रार को आवेदन देना होगा। यूसीसी के दायरे में आदिवासी, घुमंतु-अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी नहीं आएंगे।
सूत्रों के अनुसार, यूसीसी की रिपोर्ट पर समिति के सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसमें नीतिगत निर्णय के अनुसार आदिवासियों को बिल्कुल भी नहीं छेड़ा गया है। ये सभी यूसीसी के दायरे से बाहर रखेंगे। विवाह और विवाह विच्छेद के लिए सबके लिए एक जैसे प्रविधान रखेंगे। किसी को कोई विशेषाधिकार नहीं रहेगा।
संतान को मिलेंगे सभी उत्तराधिकार
लिव इन संबंधों को प्रविधान प्रस्तावित किया गया है कि इसमें रहने वालों को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई बिना पंजीयन लिव इन में रहता है और इसका जानकारी मिलती है तो आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। पंजीयन कराने पर इसकी सूचना संबंधित थाने और स्वजन को दी जाएगी यानी कोई चोरी छुपे नहीं रह सकेगा। यदि दोनों के बीच अनबन हो जाती है या स्वेच्छा से अलग होना चाहते हैं तो इसके लिए भी पंजीयन जैसी ही व्यवस्था रहेगी यानी रजिस्ट्रार के यहां आवेदन देना होगा। लिव इन में जन्मी संतान को सभी उत्तराधिकार मिलेंगे। इसके साथ ही यह प्रविधान भी किया गया है कि बच्चे की संपत्ति माता-पिता, दोनों को मिलेगी। पति की मृत्यु होने पर हक मां का रहेगा।
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अब क्या होगा
समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इसे सरकार स्वीकार करेगी। विधि एवं विधायी विभाग विधेयक के प्रारूप को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति के समक्ष विचार के लिए रखेगा। यहां से हरी झंडी मिलने पर कैबिनेट के अनुमोदन से विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने पर राज्यपाल की अनुमति से सरकार राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजेगी। यहां से अनुमोदन होने यह लागू होगा। सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में चार-पांच माह लग सकते हैं। इसके बाद नियम बनेंगे।
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यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य होगा मप्र
मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य होगा। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है। गुजरात और असम विधानसभा से यह पारित हो चुका है और लागू होने की प्रक्रिया में है।