MP में दतिया उपचुनाव के बाद दोनों दलों में संगठन सर्जरी की तैयारी, कांग्रेस बदलेगी 8 जिलाध्यक्ष; भाजपा में भी 12 पर गिर सकती है गाज
दतिया उपचुनाव के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी है। कांग्रेस ...और पढ़ें

भाजपा व कांग्रेस (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
कांग्रेस 8 जिलाध्यक्षों को हटाएगी, प्रदेश कार्यकारिणी पुनर्गठित होगी।
भाजपा भी करीब 12 जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी बदल सकती है।
दतिया उपचुनाव के बाद दोनों दलों में बदलाव की तैयारी।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में अब संगठनात्मक फेरबदल का दौर शुरू होने जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने-अपने संगठन की कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करने की तैयारी में हैं। कांग्रेस जहां आठ जिलाध्यक्षों को हटाने के साथ प्रदेश कार्यकारिणी के पुनर्गठन की योजना बना रही है, वहीं भाजपा भी करीब 12 जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी बदल सकती है।
कांग्रेस में जिलाध्यक्षों से लेकर प्रदेश कार्यकारिणी तक बदलाव की तैयारी
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस ने संगठन की समीक्षा के बाद आठ जिलाध्यक्षों के प्रदर्शन को संतोषजनक नहीं पाया है। इनमें आगर मालवा, डिंडौरी, सिंगरौली, रायसेन, आलीराजपुर और ग्वालियर ग्रामीण जैसे जिले शामिल बताए जा रहे हैं। इन जिलाध्यक्षों को जल्द ही कार्यमुक्त किया जा सकता है।
पार्टी प्रदेश कार्यकारिणी में भी व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। 253 सदस्यीय कार्यकारिणी में ऐसे पदाधिकारियों को हटाया जाएगा, जो लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय नहीं हैं। उनकी जगह नए और सक्रिय चेहरों को मौका देने की रणनीति बनाई जा रही है।
चुनावी जिम्मेदारियों के चलते भी बदल सकते हैं कुछ चेहरे
कांग्रेस नेतृत्व उन जिलाध्यक्षों की भूमिका भी बदलने पर विचार कर रहा है, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी निभानी है। इनमें सतना के जिलाध्यक्ष एवं ओबीसी कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह का नाम प्रमुख माना जा रहा है। दतिया उपचुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी।
इसी तरह गुना के जिलाध्यक्ष एवं विधायक जयवर्धन सिंह तथा राजगढ़ के जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह को भी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। डिंडौरी के जिलाध्यक्ष और विधायक ओमकार सिंह मरकाम भी चुनावी तैयारियों में व्यस्त हैं, जबकि आलीराजपुर के जिलाध्यक्ष मुकेश पटेल पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं, जिसे प्रदेश नेतृत्व ने स्वीकार नहीं किया था।
संगठन सृजन अभियान की समीक्षा बनी आधार
कांग्रेस ने भाजपा से मुकाबले के लिए 'संगठन सृजन अभियान' के तहत रायशुमारी कर जिलाध्यक्ष नियुक्त किए थे और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर भी दिया था। हालांकि अखिल भारतीय कांग्रेस की समीक्षा में कुछ जिलों में संगठनात्मक कार्य अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाए गए। इसी आधार पर अब बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। अगले दो से तीन महीनों में पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
भाजपा में भी 12 जिलाध्यक्षों पर गाज गिरने के संकेत
भाजपा में भी संगठनात्मक समीक्षा के बाद कई जिलाध्यक्षों के प्रदर्शन पर सवाल उठे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक करीब 12 जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी बदली जा सकती है। दतिया जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद वहां के जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह पहले ही पद से हट चुके हैं।
इसके अलावा बालाघाट के जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे भी उस समय चर्चा में आए, जब उनके परिजनों का नाम कथित चावल घोटाले से जुड़ा। वहीं कुछ अन्य जिलों में बूथ सशक्तीकरण और संगठनात्मक कार्यक्रमों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण नेतृत्व बदलाव पर विचार कर रहा है।
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दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अब आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और परिणाम आधारित बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अवधेश नायक को मिला इनाम
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अवधेश नायक को प्रदेश कांग्रेस महासचिव बनाया गया है। चुनाव के दौरान उनसे यह वादा किया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया।
