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MP में पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत: 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही मिलेगी 20% अतिरिक्त पेंशन, एरियर्स की मांग तेज

Published: Tue, 08 Sep 2026 08:09 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की याचिका खारिज कर दी है, जिससे अब पेंशनरों को 79 वर्ष की आयु ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।

-प्रतीकात्मक चित्र।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की याचिका खारिज की।

  2. 79 वर्ष की आयु पूरी करते ही मिलेगी अतिरिक्त पेंशन।

  3. पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने एरियर्स भुगतान की मांग की।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के पेंशनरों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब 79 वर्ष की आयु पूरी करते ही 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन का लाभ देने की मांग को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मजबूती मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) और बाद में दायर पुनर्विचार याचिका दोनों को खारिज कर दिया है।

इसके बाद पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप सभी पात्र पेंशनरों को बिना अलग-अलग न्यायालयों की शरण लिए अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिया जाए और उन्हें बकाया राशि यानी एरियर्स का भी भुगतान किया जाए।

80 साल पूरे होने के एक माह बाद मिलता था लाभ

मध्य प्रदेश में अब तक 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन का लाभ कई मामलों में पेंशनर के 80 वर्ष की आयु पूरी करने के एक माह बाद से दिया जाता था। पेंशनर्स एसोसिएशन का तर्क है कि नियमों के अनुसार 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही अतिरिक्त पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।

इस आधार पर स्पष्ट किया गया है कि पेंशनर के 79 वर्ष पूरे कर 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए।

ग्वालियर हाई कोर्ट ने दिया था पेंशनरों के पक्ष में फैसला

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना के अनुसार, 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही अतिरिक्त पेंशन देने की मांग को लेकर ग्वालियर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने पेंशनरों के पक्ष में निर्णय दिया था।

राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की, लेकिन 17 सितंबर 2024 को शीर्ष अदालत ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका भी 20 मार्च 2025 को निरस्त हो गई।

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'हर पेंशनर को कोर्ट जाने मजबूर न करे सरकार'

एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि जब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो पात्र पेंशनरों को अपने अधिकार के लिए अलग-अलग अदालतों में याचिका दायर करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि न्यायालय के निर्णय को राज्य के सभी पात्र पेंशनरों पर समान रूप से लागू किया जाए और जिन पेंशनरों को अब तक अतिरिक्त पेंशन का लाभ देरी से मिला है, उन्हें एरियर्स सहित बकाया राशि का भुगतान किया जाए।