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MP में 50 हजार से ज्यादा संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने 2400 ग्रेड पे पर लगाई मुहर

Published: Thu, 27 Aug 2026 10:16 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 50 हजार से अधिक संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों को बड़ी राहत दी है, जिसमें उन्हें ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

मप्र हाईकोर्ट भवन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने संविदा ऑपरेटरों को दी बड़ी राहत।

  2. 1900 की जगह 2400 ग्रेड पे देने का आदेश बरकरार।

  3. अन्य संविदा कर्मचारियों को भी मिल सकता है लाभ।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश में कार्यरत 50 हजार से अधिक संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकार की रिट अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 1900 के बजाय 2400 ग्रेड पे के आधार पर वेतन देने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट के इस निर्णय से विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है।

सातवें वेतनमान में घटाया गया था ग्रेड पे

मामला सातवें वेतनमान में डाटा एंट्री ऑपरेटरों के ग्रेड पे में की गई कटौती से जुड़ा है। मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर के अनुसार, डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नियुक्ति के समय से ही यूडीसी (अपर डिवीजन क्लर्क) के समकक्ष वेतनमान मिलता रहा है।

उन्होंने बताया कि चौथे, पांचवें और छठे वेतनमान में भी डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 2400 ग्रेड पे दिया गया था। हालांकि, सातवें वेतनमान में इसे घटाकर 1900 कर दिया गया। इसी कटौती को लेकर कर्मचारियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

एकलपीठ के फैसले को सरकार ने दी थी चुनौती

समग्र शिक्षा अभियान में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के तहत निर्धारित वेतन समकक्षता को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद एकलपीठ ने 1900 ग्रेड पे के प्रावधान को निरस्त करते हुए कर्मचारियों का वेतन 2400 ग्रेड पे के आधार पर निर्धारित करने के निर्देश दिए थे।

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सरकार ने इस आदेश के खिलाफ रिट अपील दायर की थी। अब हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के निर्णय को बरकरार रखा है।

अन्य संविदा कर्मचारियों को भी मिल सकता है फायदा

महासंघ का कहना है कि हाई कोर्ट का यह फैसला केवल डाटा एंट्री ऑपरेटरों तक सीमित नहीं रह सकता। प्रदेश में ऐसे कई अन्य संविदा पद हैं, जहां सातवें वेतनमान या संविदा नीति के तहत ग्रेड पे में कटौती की गई है। ऐसे मामलों में भी यह निर्णय नजीर बन सकता है और प्रभावित कर्मचारियों को न्यायालय से राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।