फर्जी लेबल, नकली QR कोड...चार माह पहले ललितपुर में पकड़ी गई थी नकली शराब की फैक्ट्री; सागर जहरीली शराब कांड से जुड़े तार
ललितपुर में चार माह पहले पकड़ी गई नकली शराब की फैक्ट्री के तार सागर जहरीली शराब कांड से जुड़े हैं। ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
हरियाणा से सस्ती स्पिरिट लाकर बनाते थे देसी शराब।
फर्जी लेबल और QR कोड का उपयोग करते थे।
मप्र के सीमावर्ती जिलों में नकली शराब खपाते थे।
डिजिटल डेस्क, सागर। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में नकली शराब का धंधा बहुत तेजी से फैला है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस साल मई में ललितपुर में नकली शराब की एक फैक्ट्री पकड़ी थी। शराब माफिया हरियाणा से सस्ती स्पिरिट खरीदकर यहां नकली देसी शराब बनाता था। उसके बाद मध्यप्रदेश की सरकारी दुकानों पर बिक रहे ब्रांड के लेबल-क्यूआर कोड आदि लगाकर उसे एमपी के सागर, निवाड़ी और छतरपुर जैसे सीमावर्ती जिलों में खपा दिया जाता था।
पुलिस व स्वाट टीम ने की थी छापामार कार्रवाई
कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम ने ललितपुर की गंगापुरम कॉलोनी स्थित फैक्ट्री पर छापा मारकर रवि लखेरा, चन्द्रेश लोधी उर्फ विक्की, मनीष विश्वकर्मा, अंकित विश्वकर्मा व पुष्पेन्द्र ठाकुर को पकड़ा था। इसके साथ ही, शिवानी लखेरा, मोना राजा, प्रेम सिंह बांगरी, दीपचन्द्र, बड़े राजा, गजेन्द्र समेत अन्य लोगों के नाम प्रकाश में आए थे।
लग्जरी कारों में करते थे तस्करी
इस गिरोह का सरगना रवि लखेरा को बताया गया था। पूछताछ में उसने बताया कि वह हरियाणा से स्प्रिट लाकर नकली शराब बनाता और उसे एमपी के सरकारी ठेकों और ढाबों को उपलब्ध कराता था। शराब ढोने के लिए लक्जरी कारों का इस्तेमाल होता था, ताकि किसी को शक न हो।
अन्य राज्यों के मजदूरों से कराते थे काम
पुलिस से बचने के लिए आरोपित स्थानीय मजदूरों के बजाय दूसरे राज्यों के मजदूर रखते थे। पुलिस ने फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली शराब बनाने का सामान बरामद किया था। बताया जा रहा है कि यह अकेला गिरोह नहीं था जो नकली शराब बना रहा था। ललितपुर और आसपास के गांवों-कस्बों में ऐसी दर्जनों फैक्ट्रियां अब भी सक्रिय हैं।
