छोटी नहीं, लंबी ट्रिप्स पर जाना चाहते हैं लोग; क्यों लोकप्रिय हो रहा है Slow Travel Trend
अब लोग साल में भले ही कम, लेकिन लंबी ट्रिप्स पर जाना पसंद कर रहे हैं। सुकून पाने और वर्क फ्रॉम एनिव्हेयर की सुविधा के कारण लोगों में काफी लोकप्रिय हुआ ...और पढ़ें

क्यों लोगों को पसंद आ रहा है स्लो ट्रैवल ट्रेंड? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में पर्यटन का नजरिया तेजी से बदल रहा है। कुछ समय पहले तक लोग चेकलिस्ट टूरिज्म के दीवाने थे, यानी तीन दिन में पांच शहर घूमना और हर मशहूर स्मारक के सामने सेल्फी लेना, लेकिन अब स्लो ट्रैवल का चलन बढ़ रहा है।
लोग अब साल में चार बार छोटी और भागदौड़ भरी ट्रिप्स पर जाने के बजाय, साल में एक या दो बार लंबी और सुकून भरे वेकेशन पर जाना पसंद कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि यह स्लो ट्रैवल क्या है और लोगों के बीच यह इतना मशहूर क्यों हो रहा है।
क्या है स्लो ट्रैवल?
स्लो ट्रैवल का मतलब है बिना किसी जल्दबाजी के आराम से ट्रैवल करना। इसमें यात्री किसी जगह के एक्सपीरिएंस को महसूस करते हैं। एक ही शहर या गांव में कुछ दिन रुकते हैं, लोकल बाजार, खान-पान और संस्कृति को एक्सपीरिएंस करते हैं।

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लोगों को क्यों पसंद आ रहा है यह ट्रेंड?
- मानसिक शांति और बर्नआउट से बचाव- हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पहले से ही समय की पाबंदी और डेडलाइंस से भरी है। छोटी ट्रिप्स में अक्सर हम और ज्यादा थक जाते हैं, क्योंकि हमें कम समय में बहुत कुछ कवर करना होता है। लंबी ट्रिप्स लोगों को रुकने, सांस लेने और मेंटल बर्नआउट को दूर करने का मौका देती हैं।
- सांस्कृतिक अनुभव- जब आप किसी जगह पर कुछ दिन रुकते हैं, तो आप वहां के पर्यटकों वाले रास्तों से हटकर असली जीवन देख पाते हैं। आप लोकल कैफे में घंटों बैठ सकते हैं, वहां के लोगों से बात कर सकते हैं और उनके खान-पान को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। यह अनुभव किसी 2-दिन की ट्रिप में मुमकिन नहीं है।
- वर्क फ्रॉम एनीव्हेयर- डिजिटल एज और रिमोट वर्किंग ने इस ट्रेंड को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया है। अब लोग अपने लैपटॉप के साथ पहाड़ों या समुद्र किनारे जा रहे हैं। वे दिन में काम करते हैं और शाम को नई जगहों को एक्सप्लोर करते हैं। इसके लिए लंबी ट्रिप सबसे परफेक्ट होती है।
- पर्यावरण के लिए जागरूकता- बार-बार फ्लाइट लेना या छोटी दूरी के लिए बार-बार गाड़ियों का इस्तेमाल करना कार्बन फुटप्रिंट बढ़ाता है। स्लो ट्रैवलर अक्सर ट्रेन या पैदल चलना पसंद करते हैं, जो पर्यावरण के लिए कम हानिकारक है। यह सस्टेनेबल टूरिज्म का एक बड़ा हिस्सा है।
- बजट फ्रेंडली- सुनने में लंबी ट्रिप महंगी लग सकती है, लेकिन असल में यह किफायती हो सकती है। बार-बार ट्रांसपोर्ट पर खर्च करने के बजाय एक जगह रहने और खाने का खर्च कम हो जाता है। होमस्टे या अपार्टमेंट रेंट पर लेना होटल के मुकाबले सस्ता पड़ता है।
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