विज्ञान के लिए आज भी अबूझ पहेली है हम्पी का विरूपाक्ष मंदिर, दीवारों पर दिखती है शिखर की उल्टी परछाई
हम्पी का विरुपाक्ष मंदिर, 1000 सालों से भारत की आध्यात्मिक और वास्तुकला की कहानी बयां कर रहा है। ...और पढ़ें

अगर भारतीय संस्कृति और वास्तुकला से है प्यार, तो एक बार जरूर देखें हम्पी का 'विरूपाक्ष मंदिर' (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम्पी के प्राचीन और शांत वातावरण के बीच एक ऐसी धरोहर खड़ी है, जो बीते 1000 सालों से भारत की आध्यात्मिक और वास्तुकला की कहानी बयां कर रही है। जी हां, यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया विरूपाक्ष मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि आस्था और कला का एक जीता-जागता अजूबा है।
यह पवित्र स्थल भगवान शिव के 'विरूपाक्ष' अवतार को समर्पित है। आइए जानते हैं क्या है जो इस मंदिर को इतना खास बनाता है।

(Image Source: Incredible India)
सातवीं सदी की कुटिया से विजयनगर की शान तक
इस स्थान का इतिहास बेहद दिलचस्प है। 7वीं शताब्दी में यह केवल एक छोटा-सा पूजा स्थल हुआ करता था, लेकिन जब यहां विजयनगर साम्राज्य का दौर आया, तो उनके शासकों ने इसे एक विशाल और भव्य रूप दे दिया। मंदिर परिसर में एक शिलालेख मौजूद है जो बताता है कि इस बेजोड़ स्थापत्य को निखारने में महान राजा कृष्णदेवराय का कितना बड़ा योगदान था।
गणित और कला का ऐसा संगम, जो विज्ञान को भी हैरान कर दे
विरूपाक्ष मंदिर की वास्तुकला केवल सुंदर ही नहीं, बल्कि पूरी तरह से गणितीय सिद्धांतों पर आधारित है। मंदिर की दीवारों पर उकेरी गई आकृतियां असल में 'फ्रैक्टल' हैं- यानी ऐसे डिजाइन जो हर पत्थर और हर कोने पर एक समान रूप से खुद को दोहराते हैं। इसके अलावा, इस पूरे मंदिर को एक विशेष त्रिकोणीय आकार में बनाया गया है।
एक और जादुई अनुभव जो आपको यहां देखने को मिलेगा, वह है प्रकाश का खेल। मंदिर की दीवारों पर मुख्य टावर की उल्टी परछाई पड़ती है, जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
आसमान चूमते द्वार और 38 खंभों का 'रंगा मंडप'
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही 50 मीटर ऊंचा राजसी टावर आपका स्वागत करता है। इसके अंदर तीन और विशाल गोपुरम हैं। इनमें से एक 9 मंजिला ऊंचा टावर है, जो हम्पी की बाकी सभी इमारतों से ऊंचा है। इस टावर की हर मंजिल पर भगवान शिव, राम, लक्ष्मण, सीता, गणेश और नंदी की बेहद खूबसूरत मूर्तियां विराजमान हैं।
खबरें और भी
- मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका मध्य भाग है, जिसे 'रंगा मंडप' कहा जाता है।
- प्रवेश द्वार पर दो शेर जैसी आकृतियां और दाईं ओर पवित्र नंदी बैल की नक्काशी है।
- अंदर 5 कतारों में 38 भव्य खंभे खड़े हैं।
- इन खंभों पर पौराणिक योद्धाओं और जलीय जीवों के ऊपर सवार 'याली' (शेर जैसे जीवों) की मूर्तियां उकेरी गई हैं, जो बहादुरी का प्रतीक हैं।
- छत पर महाकाव्यों और पुराणों की कहानियां चित्रों के रूप में सजी हुई हैं।

(Image Source: Freepik)
शिव-पार्वती के अमर प्रेम की गवाही
मंदिर के अस्तित्व से एक बहुत ही सुंदर पौराणिक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए हम्पी की हेमकुटा पहाड़ियों पर सालों तक घोर तपस्या की थी। उनकी इस अटूट भक्ति को देखकर शिव जी ने इसी स्थान पर उनसे विवाह किया। आज भी यह मान्यता है कि इस मंदिर के सजे हुए मंडप में जो जोड़ा विवाह करता है, उसे सीधे शिव-पार्वती का आशीर्वाद मिलता है।
हर साल दिसंबर के महीने में यहां विरूपाक्ष और पंपा के विवाह का जश्न मनाया जाता है। वहीं, फरवरी में होने वाला 'रथ महोत्सव' भी मंदिर को एक गजब की आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।
आसपास के ऐतिहासिक स्थल
इस मंदिर की भव्यता इतनी अनोखी है कि यह फिल्म निर्माताओं को भी बहुत पसंद आता है। 2005 में आई स्टैनली टोंग की हॉलीवुड फिल्म 'द मिथ' के कई एक्शन और फैंटेसी सीन इसी मंदिर में शूट किए गए थे।
मंदिर के दर्शन के बाद, आप हम्पी के इन आसपास के आकर्षणों को भी देख सकते हैं:

(Image Source: Freepik)
- लोटस महल: कमल के आकार की छत वाला दो मंजिला खूबसूरत महल।
- महानवमी डिब्बा: शानदार नक्काशी वाला तीन मंजिला मंच, जहां कभी शाही कार्यक्रम होते थे।
- किंग्स बैलेंस: राजा के खजाने और उपहारों को तौलने वाला एक प्राचीन और विशाल पत्थर का तराजू।
- हाथियों का अस्तबल: शाही हाथियों के ठहरने के लिए बनाए गए खास कमरे।
- हेमकुटा पहाड़ी के मंदिर: 7वीं सदी के भगवान विष्णु और शिव को समर्पित प्राचीन मंदिर।
सुकून, रोमांच और लाजवाब भोजन
हम्पी सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि अनुभवों का शहर है। आप यहां के शांत माहौल में योग और ध्यान की प्राचीन विधाएं सीख सकते हैं। अगर आप रोमांच के शौकीन हैं, तो एक्सपर्ट्स की मदद से रॉक-क्लाइम्बिंग और उबड़-खाबड़ रास्तों पर ट्रेकिंग का मजा ले सकते हैं।
घूमने के बाद जब भूख लगे, तो हम्पी का स्वाद आपको दीवाना बना देगा। नाश्ते में परोसे जाने वाले स्वादिष्ट इडली-वड़े से लेकर, दोपहर और रात के खाने की पारंपरिक थाली का स्वाद आप कभी भूल नहीं पाएंगे। खाना इतना स्वादिष्ट होता है कि आप अपनी डाइट भूलकर ज्यादा खा लेंगे।
अगर आपको भारतीय संस्कृति, इतिहास और बेहतरीन वास्तुकला से प्यार है, तो विरूपाक्ष मंदिर की यह यात्रा आपके लिए एक ऐसा अनुभव साबित होगी, जिसे आप जीवन भर याद रखेंगे।
Source: Incredible India
यह भी पढ़ें- इस अनोखे मंदिर के पत्थरों से सुनाई देता है संगीत, विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया इसका रहस्य
यह भी पढ़ें- इतिहास, कला और शांति का संगम: खंभालिदा की गुफाओं में छिपा है वो सुकून, जिसे पाने के लिए तरसते हैं लोग