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कार में रखी पानी की बोतल और चश्मा भी लगा सकते हैं आग! गर्मी में भूलकर भी गाड़ी में न छोड़ें ये 5 चीजें

Published: Wed, 22 Apr 2026 11:59 AM (IST)

गर्मी के मौसम में बंद कार के अंदर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए गाड़ी के अंदर रखी कुछ चीजों से आग लगने का खतरा रहता है।

गाड़ी के अंदर गलती से भी न छोड़े ये चीजें (Picture Courtesy: Freepik)

गाड़ी के अंदर गलती से भी न छोड़े ये चीजें (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में कार केवल सफर का साधन नहीं रह जाती, बल्कि वह धूप में खड़े-खड़े एक भट्टी में तब्दील हो जाती है। जब बाहर का तापमान 35°C होता है, तो बंद कार के अंदर का तापमान मात्र 30 मिनट में 50-60°C तक पहुंच सकता है। 

ऐसी स्थिति में कार के अंदर रखी कुछ मामूली चीजें आपकी कार को आग के हवाले कर सकती हैं। इसलिए अगर आप कार से किसी रोड ट्रिप पर जा रहे हैं, तो सुरक्षा के लिहाज से कुछ चीजों को भूलकर भी अपनी कार में नहीं छोड़ना चाहिए। आइए जानें इनके बारे में। 

लाइटर 

धूप में खड़ी कार में रखा एक छोटा-सा सिगरेट लाइटर सबसे बड़ा खतरा है। लाइटर के अंदर ज्वलनशील पदार्थ और गैस प्रेशर में भरी होती है। जब कार का तापमान बढ़ता है, तो यह गैस फैलती है। ज्यादा दबाव के कारण लाइटर फट सकता है, जिससे निकली चिंगारी कार की सीटों या प्लास्टिक के हिस्सों में तुरंत आग लगा सकती है।

सैनिटाइजर और परफ्यूम 

कोरोना काल के बाद सैनिटाइजर हर कार का हिस्सा बन गया है, लेकिन इसमें 70% से ज्यादा अल्कोहल होता है, जो बेहद ज्वलनशील है। इसी तरह, डिओडोरेंट, बॉडी स्प्रे और एयर फ्रेशनर के कैन दबाव वाले होते हैं। गर्मी के कारण इन बोतलों में दबाव बढ़ता है और वे फट सकती हैं, जिससे कार में भीषण आग लग सकती है।

Things to not leave inside car (1)

(AI Generated Image)

पावर बैंक और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स

मोबाइल फोन, पावर बैंक और लैपटॉप में लिथियम-आयन बैटरी होती है। ये बैटरियां एक फिक्स तापमान तक ही काम करने के लिए बनी होती हैं। ज्यादा गर्मी के कारण ये बैटरियां थर्मल रनअवे की स्थिति में पहुंच जाती हैं, जिससे वे फूल जाती हैं और उनमें विस्फोट हो जाता है। पावर बैंक को डैशबोर्ड पर छोड़ना सबसे खतरनाक है क्योंकि वहां सीधी धूप पड़ती है।

पानी की प्लास्टिक बोतल

सुनने में यह अजीब लग सकता है कि पानी आग कैसे लगा सकता है? लेकिन पानी से भरी एक प्लास्टिक की बोतल एक मैग्नीफाइंग ग्लास की तरह काम करती है। अगर सूरज की किरणें बोतल से होकर कार की सीट या किसी कपड़े पर एक बिंदु पर फोकस होती हैं, तो वहां ज्यादा गर्मी पैदा होती है और कुछ ही मिनटों में धुआं निकलने लगता है, जो आग का कारण बन सकता है।

चश्मा और लेंस

कार के डैशबोर्ड पर रखा चश्मा या रीडिंग ग्लास भी वही काम करता है जो पानी की बोतल करती है। चश्मे के लेंस धूप को एक जगह फोकस कर सकते हैं, जिससे डैशबोर्ड की प्लास्टिक पिघल सकती है या आग लग सकती है।