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एक जहाज बनाने में लगते थे 2000 पेड़, अब मॉल में मौजूद इसका विशाल मॉडल सुना रहा है 400 साल पुरानी कहानी

Published: Tue, 13 Oct 2026 05:39 PM (IST)Updated: Tue, 13 Oct 2026 07:09 PM (IST)

फिलीपींस की राजधानी मनीला के मॉल ऑफ एशिया में म्यूजियो डेल गैलियन खुला है, जहां 17वीं सदी के समुद्री व्यापार का अनुभव किया जा सकता है।

फिलीपींस का सबसे अनोखा म्यूजियम (Picture Courtesy: Instagram)

फिलीपींस का सबसे अनोखा म्यूजियम (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज दुनियाभर में मर्चेंट जहाजों, टैंकरों और क्रूज पर 25% से 30% तक नाविक फिलीपींस से हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिलीपींस के लोगों की जहाजों से जुड़ी कुशलता की जड़ें सदियों पुरानी हैं?

इसी ऐतिहासिक सफर को अनुभव करने के लिए फिलीपींस की राजधानी मनीला के मॉल ऑफ एशिया में म्यूजियो डेल गैलियन खोला गया है। आइए जानें इसकी खासियत क्या है। 

शोर-शराबे के बीच शांति का केंद्र

मॉल ऑफ एशिया दुनिया के सबसे बड़े शॉपिंग और एंटरटेनमेंट कॉम्प्लेक्स में से एक है, जहां 660 से ज्यादा दुकानें और रेस्तरां हैं। यहां मार्चिंग बैंड की गूंज के बीच ये म्यूजियम विजिटर्स के लिए एक शांति भरा अनुभव देता है।

galeon espiritu santo museum manila

(Picture Courtesy: Instagram)

Galeon Espiritu Santo का अनुभव

म्यूजियम के अंदर घुसते ही लगभग 100 फीट ऊंचे और 130 फीट से ज्यादा लंबे Galeon Espiritu Santo जहाज का फुल स्केल मॉडल सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। असली जहाज 1603 से 1618 के बीच मनीला और मेक्सिको के अकापुल्को के बीच प्रशांत महासागर में 10 बार यात्रा कर चुका है।  

उस समय में एशिया के सिल्क, चीनी मिट्टी के बर्तन और मसालों के बदले न्यू वर्ल्ड की चांदी का व्यापार होता था। इसे इतिहास के शुरुआती ग्लोबल ट्रेड नेटर्वक में से एक माना जाता है। 250 सालों में 181 जहाजों ने कुल 798 यात्राएं कीं।

म्यूजियम की छत पर बनी एलईडी तारों की एक बड़ी छतरी बनी है, जो विजिटर्स को रात के प्रशांत महासागर का दृश्य दिखाती है। इसके अलावा, यहां टचस्क्रीन और मसालों की खुशबू महसूस कराने वाले 6 अलग-अलग स्टेशन मौजूद हैं, जो इस पूरे अनुभव को और भी खास बनाते हैं। 

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(Picture Courtesy: Instagram)

दो हजार पेड़ों से बना जहाज

असली Galeon Espiritu Santo का निर्माण मनीला के दक्षिण में स्थित कैविट में सागौन, मोलावे और लानांग जैसी लकड़ियों से हुआ था। उस समय एक जहाज को बनाने में लगभग दो हजार पेड़ लगते थे। हालांकि, म्यूजियम में रखा इसका मॉडल फाइबरग्लास से बना है, जिसे पम्पांगा में तैयार किया गया है। 

म्यूजियम ले जुड़ी जानकारी

इस म्यूजियम में बने बुलेटिन बोर्ड पर नाविक अपने संदेश और प्रेरक विचार छोड़ते हैं। ये म्यूजियम बुधवार से रविवार को सुबह 10 से शाम 7 बजे तक खुला रहता है। म्यूजियम के अंदर प्रवेश करने केलिए व्यस्कोंं के लिए 675 पेसो और 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 375 पेसो फीस है। स्टूडेंट्स, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को एंट्री फी पर छूट भी मिलती है।