"हां, मैं साइको हूं!" आखिर क्यों हर तीसरा युवा खुद को मान रहा मनोरोगी? सोचने पर मजबूर कर देगी रिपोर्ट
अमेरिका में हुए एक सर्वे के अनुसार, हर तीसरा युवा खुद को 'मनोरोगी' मानता है और रिश्तों को सुलझाने के बजाय उनसे दूरी बनाना पसंद करता है। ...और पढ़ें

सर्वे ने खोली पोल- क्यों ताश के पत्तों की तरह बिखर रहे हैं आज के रिश्ते? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में रिश्ते निभाना कितना मुश्किल हो गया है, इसका अंदाजा अमेरिका में हुए एक नए सर्वे से लगाया जा सकता है।
टॉकर रिसर्च के इस अध्ययन ने कुछ ऐसी बातें उजागर की हैं, जो सोचने पर मजबूर कर देती हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि युवा न सिर्फ अपनों से कट रहे हैं, बल्कि अपनी मेंटल हेल्थ को लेकर भी उनके अजीबोगरीब दावे हैं। आइए इस सर्वे के नतीजों को डिटेल में समझते हैं।

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युवाओं की नजर में खुद की छवि
इस रिसर्च की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अमेरिका के 19 फीसदी वयस्कों ने माना कि वे 'मनोरोगी' हैं। अगर बात सिर्फ आज की पीढ़ी यानी Gen-Z की करें, तो हर तीसरा युवा (30%) खुद को ऐसा ही मानता है। इन युवाओं का कहना है कि उन्हें महीने में औसतन दो बार 'मनोरोग के दौरे' आते हैं। यह आंकड़ा पुरानी पीढ़ी यानी बूमर्स के मुकाबले सीधा दोगुना है। दिलचस्प बात यह है कि कई युवाओं ने यह भी दावा किया कि वे इन दौरों के आने का पहले से ही सटीक अनुमान लगा लेते हैं।
अब रिश्ते सुधारे नहीं, सीधे 'डिलीट' किए जा रहे हैं

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जब रिश्तों में खटास आती है, तो लोग उसे सुलझाने के बजाय दूरी बनाना ज्यादा पसंद करने लगे हैं। सर्वे बताता है कि करीब 73% लोग समस्याओं पर खुलकर बात करने से बचते हैं। पिछले एक साल के आंकड़े देखें तो 60% जेन जी और 50% मिलेनियल्स ने अपने किसी करीबी से पूरी तरह संपर्क तोड़ लिया। इसके उलट, पुरानी पीढ़ी में यह आंकड़ा सिर्फ 20% था।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
जब लोगों से रिश्ते तोड़ने की वजह पूछी गई, तो ज्यादातर (36%) का कहना था कि सामने वाला उनका सम्मान नहीं करता था। इसके अलावा, रिश्ते की वजह से मानसिक शांति छिनने (29%), सामने वाले का बहुत ज्यादा नकारात्मक होना (27%) और विचारों का न मिलना (24%) भी रिश्ते टूटने की बड़ी वजहें रहीं।
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जान-पहचान वालों को देख रास्ता बदल लेते हैं 40% लोग

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यह दूरी सिर्फ बातचीत बंद करने तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में 36% लोगों ने अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को सोशल मीडिया पर ब्लॉक किया है, जबकि 30% ने उन्हें किसी पुरानी बात पर ग्रुप चैट से बाहर निकाल दिया है।
लोग अब तकनीक का इस्तेमाल दूसरों से बचने के लिए कर रहे हैं। 68% लोग ऑनलाइन शॉपिंग करना पसंद करते हैं और 64% लोग स्टोर में कर्मचारियों से बचने के लिए 'सेल्फ-चेकआउट' मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि 37% लोग किसी अजनबी से छोटी-सी बातचीत से बचने के लिए फोन पर बात करने का दिखावा करते हैं। वहीं, 40% लोग किसी परिचित को देखकर रास्ता ही बदल लेते हैं ताकि उन्हें रुककर बात न करनी पड़े।
अकेलेपन का बढ़ता साया
लोगों से बचने की इस आदत का सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। आज 47% लोग अपने रोजाना के जीवन में अकेलापन महसूस करते हैं। 34% लोगों का मानना है कि पांच साल पहले की तुलना में आज वे समाज से बहुत कम जुड़े हुए हैं।
टॉकस्पेस की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निकोल बेंडर्स-हाडी का कहना है कि रिश्तों की उलझनों से भागना अब आम हो गया है, लेकिन यही चीज अकेलापन बढ़ाती है। उनका सुझाव है कि स्थितियां असहज होने पर भी हमें बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहिए और अपनी स्वस्थ सीमाएं तय करते हुए रिश्तों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए।
कैसा होना चाहिए एक मजबूत रिश्ता?
इस सर्वे में यह भी सामने आया कि लोग एक अच्छे रिश्ते से क्या उम्मीद करते हैं। 47% लोगों का मानना है कि एक स्वस्थ रिश्ता वह है जहां वे सुरक्षित महसूस करें और बिना डरे अपनी बात रख सकें। 41% लोगों के लिए एक-दूसरे की सफलता पर खुश होना, भावनाओं को समझना, रिश्ते में भरोसा होना और एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना सबसे अहम है।
भले ही 68% लोगों को समाज में घुलने-मिलने में दिक्कत होती हो (जिसकी मुख्य वजह सामाजिक घबराहट और अकेले रहने की चाहत है), लेकिन उम्मीद की किरण अभी बाकी है। 31% लोग आज भी लोकल इवेंट्स में जाकर, पड़ोसियों से दोस्ती करके या सोशल वेलफेयर के जरिए अपनी कम्युनिटी से दोबारा जुड़ना चाहते हैं।