अब पढ़ाई के लिए कमर कसने की बारी, बोर्ड एग्जाम के लिए बच्चों को ऐसे करें तैयार
सेलिब्रेशन के सारे बहाने अब हो गए हैं समाप्त। अब समय है पढ़ाई के लिए कमर कसने का। बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयारी करने के लिए है पर्याप्त समय। तरीका बता ...और पढ़ें
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बोर्ड एग्जाम की तैयारी: बच्चों को तनाव मुक्त और अनुशासित कैसे करें (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
सकारात्मक माहौल बनाएं, बच्चों से खुलकर बात करें
संतुलित टाइम-टेबल, मुश्किल विषयों पर अधिक ध्यान दें
स्वस्थ खान-पान, पर्याप्त नींद और फोन से दूरी रखें
आरती तिवारी, नई दिल्ली। समस से लेकर नए साल का सेलिब्रेशन हो गया। जश्न के सारे बहाने पूरे हो चुके हैं और अब सामने है- बोर्ड परीक्षा की चुनौती। इन उत्सवों और बढ़ती ठंड के चलते पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। अक्सर छात्र और माता-पिता इस समय तनाव महसूस करने लगते हैं, लेकिन सच तो यह है कि अभी भी आपके पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय है। बस जरूरत है सही दिशा और अनुशासन की।
तैयार करें सकारात्मक माहौल
बोर्ड परीक्षा का समय तनाव वाला होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि माता-पिता भी तनाव देने का काम करें। बच्चे को महसूस कराएं कि उसके मुश्किल समय में आप उसके साथ हैं। समय-समय पर उससे बात करें, उसकी तैयारी का तरीका जानें और पूछें कि उसे कोई समस्या तो नहीं आ रही। हां, सजग रहें कि बच्चे पूरी तरह आप पर ही निर्भर न हो जाएं। उनसे पूछें कि किस विषय में उन्हें डर लग रहा है और आप उसमें क्या मदद कर सकते हैं। जब बच्चा एक टारगेट पूरा कर ले, तो उसकी छोटी सी तारीफ करें। जितना आप उन पर विश्वास दिखाते हुए बात करेंगे, उतना ही वे आपसे जुड़कर परेशानियां साझा करते हैं।
टाइम-टेबल का सही तरीका
कई बार होता है कि बच्चे पढ़ाई का टाइम-टेबल तो बना लेते हैं, मगर एक-दो दिन के बाद ही इसके हिसाब से पढ़ाई नहीं हो पाती। बेहतर होगा बच्चों के साथ बैठकर उन्हें यह बात समझाएं कि किस तरह संतुलित टाइम-टेबल बनाया जाए। सालभर की तैयारी तो काम आती ही है, लेकिन अगर बच्चे को किसी विषय में मुश्किल आ रही है तो उस पर थोड़ी ज्यादा मेहनत और समय देकर कवर किया जा सकता है।
इसमें छोटे-छोटे टापिक पहले कवर करें, यह बच्चे में विषय को लेकर आत्मविश्वास पैदा करेगा। हर दिन पढ़ाई की शुरुआत उसी मुश्किल विषय से करें ताकि दिमाग पूरी ऊर्जा के साथ विषय को समझ ले। इस तरह आसान और मुश्किल विषयों का सही संतुलन बनाकर टाइम-टेबल तैयार करें। प्रश्नों के छोटे-छोटे प्वाइंट बनाकर पढ़ाई करने की सलाह दें। हर दूसरे-तीसरे दिन अब तक की पढ़ाई को रिवाइज करने के लिए भी कहें। यह तरीका लांग टर्म मेमोरी में चैप्टर याद रखने में सहायक होता है।
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सेहत का रखें खास ध्यान
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग वास करता है। पढ़ाई के दबाव में अक्सर बच्चे खान-पान और नींद को नजरअंदाज कर देते हैं। बच्चों को जंक फूड से दूर रखें। उनके आहार में नट्स (बादाम, अखरोट), ताजे फल, हरी सब्जियां और दालें शामिल करें। सुनिश्चित करें कि बच्चा दिनभर पर्याप्त पानी पिए। डिहाइड्रेशन से थकान और सुस्ती महसूस होती है। इस दौरान नींद से समझौता नहीं करना चाहिए।
याददाश्त और एकाग्रता के लिए 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है। देर रात तक जागने के बजाय सुबह जल्दी उठकर पढ़ने की आदत बेहतर होती है। लगातार बैठने से चिड़चिड़ापन बढ़ता है। कई बार बच्चे दिमाग को बहुत ज्यादा थका देने के बाद ही सोने जाते हैं। यह गलत तरीका है। अगर रोज रात को 10 बजे सोने की आदत है, तो तैयारी के दौरान इससे छेड़छाड़ न करें। हां, अगर बच्चों में पावरनैप लेने की आदत है, तो यह भी बहुत सहायक होती है।
वरदान न बने परेशानी
फोन जितना डिस्ट्रैक्ट आपको अपने काम के बीच में करता है, पढ़ाई में बच्चे भी इससे बच नहीं पाते। इसलिए पढ़ाई के दौरान फोन दूर रखने, तैयारी के बीच फोन का नियंत्रित इस्तेमाल करने जैसी बातों पर जितनी जल्दी हो सके, बच्चों से बात करें। ‘डिजिटल डिटाक्स’ और ‘स्मार्ट यूजेज’ के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। कम से कम एक घंटा लगातार पढ़ने की आदत डालने को कहें। इसके बाद अगर बच्चे फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह ब्रेक सिर्फ 10-15 मिनट का हो। फोन इस्तेमाल करते हुए समय का पता नहीं चल पाता। ऐसे में आप उन्हें स्वयं क्विक रिमांइडर दें कि 15 मिनट का ब्रेक पूरा हुआ।