शादी के बाद बच्चे पैदा न करना स्वार्थ नहीं! स्टडी ने बताया 'Childfree' और 'Childless' के बीच का असली फर्क
कपल का चाइल्ड फ्री रहने का फैसला प्राइवेट है, इसी में उनकी खुशी और संतुष्टि छिपी हुई है।

बच्चे पैदा न करने वाले कपल स्वार्थी नहीं (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे भारतीय समाज का तानाबाना कुछ इस तरह बुना हुआ है कि जब भी कोई कपल फैमिली प्लानिंग नहीं करने का फैसला लेते हैं तो यह फैसला उनका निजी नहीं रह जाता। ऐसे कपल्स को दुनिया सेल्फिश का टैग देने से भी नहीं कतराती है, जबकि इसे लेकर सामने आ रही स्टडीज समाज की इस सोच पर पूर्ण विराम लगाने का काम कर रही हैं।
बच्चे पैदा न करने वाले कपल स्वार्थी नहीं
इंडियन सोसायटी में शादी और फिर बच्चे पैदा करना वो शर्त है, जिसे न निभाने वाले कपल समाज की नजरों में खूब खटकते हैं। वहीं, कई सारी स्टडी यह बताती हैं कि बिना बच्चे के रहना कम परवाह करना, कम खुश या कम संतुष्टि होना नहीं है। इससे जुड़ा सबसे बड़ा मिथक यही है कि जो लोग बच्चे पैदा नहीं करते, उन्हें आगे चलकर इस बात का पछतावा होगा या फिर वो अपने जीवन में आगे चलकर कम संतुष्ट रहेंगे।
कपल के लक्ष्यों और मूल्यों से जुड़ा है यह फैसला
कपल का चाइल्ड फ्री रहने का फैसला अपने लक्ष्यों, मूल्यों और जीवन जीने के तरीकों को ध्यान में रखकर करते हैं। इसे लेकर साल 2022 में सिस्टमैटिक रिव्यू किया गया था, जिसमें कपल से जुड़ी ऐसी 15 स्टडीज शामिल की गईं जिन्होंने बिना बच्चे के रहने का निर्णय किया था। रिव्यू करते समय ऐसे कोई सबूत नहीं मिले जो यह साबित करें कि बिना बच्चे के रहने से व्यक्ति कम खुश या कम संतुष रहता है।
बिना बच्चे के रहना और बच्चे न होने में है बड़ा फर्क
अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि पेरेंट्स न बनना मतलब खुद को सबसे ऊपर रखना। समाज को यह समझने की जरूरत है कि बिना बच्चे के रहना और बच्चे न होने में बहुत बड़ा फर्क है। बिना बच्चे के रहने वाले कपल वो हैं जिनके बच्चे नहीं है और न ही वो चाहते हैं। जबकि कुछ ऐसे भी कपल हैं जो फैमिली प्लानिंग करना चाहते हैं, पर इंफर्टिलिटी या कोई और शारीरिक समस्या उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होने दे रही।
वहीं, साइकोलॉजी चाइल्ड फ्री रहने को एकदम अलग नजरिए से देखती है। डवर्ड डेसी और रिचर्ड रयान की इससे जुड़ी सेल्फ डेटर्मिनेशन थ्योरी कहती है कि लोग तब ज्यादा खुश और संतुष्ट महसूस करते हैं, जब वो जीवन के फैसले अपने मूल्यों और लक्ष्यों के आधार पर खुद से लेते हैं।
संतुष्टि सबके लिए अलग
साइकोलॉजी इस मुद्दे की बहस में नहीं जाती कि चाइल्ड फ्री रहना चाहिए या नहीं, यह कहती है कि सबके लिए संतुष्टि अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोगों को बच्चों का लालन-पालन करने में खुशी मिलती है तो कुछ लोगों के लिए खुशी उनका करियर, घूमना-फिरना या क्रिऐटिवटी हो सकती है।
