फिटनेस या करियर ही नहीं, नए साल पर सेट करें 'पेरेंटिंग के गोल्स', रिश्तों में आ जाएगी खुशियों की बहार
नए साल की शुरुआत से पहले ही तय होने लगते हैं आगामी वर्ष के चैलेंज। माता-पिता होने के नाते आप भी लें बच्चों के लिए कुछ ऐसे चैलेंज, जो वर्ष के अंत तक बन ...और पढ़ें

नए साल में लें पेरेटिंग के नए चैलेंज (Image Source: AI-Generated)
HighLights
रिश्ता डायरी' बनाकर बच्चों को रिश्तों का महत्व सिखाएं
गैजेट छोड़कर बच्चों के साथ 15 मिनट गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं
बच्चों को धन्यवाद और सम्मान का पाठ घर से सिखाएं
आरती तिवारी, नई दिल्ली। नए साल की आहट होते ही हम अक्सर अपनी फिटनेस, करियर और आर्थिक लक्ष्यों की सूची बनाने लगते हैं। मगर माता-पिता होने के नाते क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों के साथ आपके रिश्तों की डोर कितनी मजबूत है? इसमें कोई दोराय नहीं कि पैरेंटिंग के कोई तय नियम नहीं होते, लेकिन कुछ छोटे- छोटे बदलाव आगामी साल के अंत तक आपके और बच्चों के बीच के जुड़ाव को अटूट बना सकते हैं। कुछ ऐसे चैलेंज हैं जिनको इस वर्ष ध्यान में रखकर आप पैरेंटिंग के रास्ते में आगे बढ़ते जाएं तो पैरेंटिंग की राह में बनने वाले चैलेंज तय करेंगे खुशियों की मंजिल।

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जुड़ जाएं रिश्तों की जड़ें
नए साल की शुरुआत शुभकामनाओं के संदेशों से होती है। बच्चों को सिखाएं कि यह सिर्फ एक दिन का रिवाज नहीं, बल्कि पूरे साल का नियम है। उनके साथ मिलकर एक 'रिश्ता डायरी' तैयार करें। इसमें परिवार के सदस्यों, शिक्षकों और मित्रों के नाम का एक पृष्ठ तय करें। उनसे जुड़ी जन्मतिथि, शादी की सालगिरह और अन्य आवश्यक तारीखों को लिखें। जब आप बच्चे के साथ मिलकर किसी को शुभकामनाएं देंगे, तो वह रिश्तों की अहमियत व आवश्यकता समझेगा। साथ जुड़कर रहने का संस्कार यहीं से रोपित होगा। अगर आपको लगता है कि इससे पहले कभी बात नहीं को और अब ऐसे यूं ही किसी दिन फोन करना अजीब रहेगा तो यह समझें कि रिश्ते उसी दिन से बेहतर होने लगते हैं, जिस दिन से हम उन्हें समय देना शुरू करते हैं।
पांच मिनट में महकें दिल
घर पर मेहमान आए नहीं कि बच्चे तुरंत अपने कमरे में निकल जाते हैं। मेहमान के सामने बैठे हैं तो थोड़ी ही देर में उनकी अंगुलियां मोबाइल की स्क्रीन पर चली जाती हैं। । ऐसे में कैसे महके रिश्तों के फूल ? उसका उपाय है सामान्य हाल-चाल से आगे बढ़कर पांच मिनट की फोन काल । इस पांच मिनट में किसी एक रिश्तेदार से दिनभर की छोटी-सी बातचीत करें। शाट्स और रील्स के जमाने में बच्चे लंबी बातें करना भूलते जा रहे हैं। ऐसे में, यह स्पीच और हीलिंग थेरेपी का काम करेगी। भविष्य में पीपल स्पीकिंग स्किल को भी मजबूत बनाएगी।
मुस्कान का जादू
बच्चों के साथ जब भी निकलें, उनके सामने घरेलू मददगार, माली, सहायक, गार्ड आदि के साथ मुस्कुराकर बात करें। उन्हें अपने सहायकों द्वारा किए जाने वाले कामों के महत्व को बताएं। इस तरह बच्चे समझते हैं कि मुस्कुराकर आप हर किसी के साथ जुड़ाव कायम कर सकते हैं। यह तरीका लोगों के विश्वास कायम करने में मदद करता है। आपके व्यवहार को देखकर बच्चा समझेगा कि हर इंसान सम्मान का हकदार है।
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धन्यवाद का सबक
इसके साथ ही धन्यवाद देने की आदत को घर से शुरू करें। अक्सर बच्चे (और बड़े भी) घर में मिलने वाली सुविधाओं को 'फार ग्रांटेड' ले लेते हैं। बिना कहे गरम खाना मिलना या धुले हुए कपड़े मिलना, नहाने से पहले ही गीजर आन होना या लैपटाप पर काम करने बीच ही काफी या चाय का प्याला, इन छोटी बातों के लिए शुक्रिया कहना बच्चों को सहिष्णु और विनम्र बनाता है।
उम्मीदों का स्तर हो नियंत्रित
कई बार चैलेंज इस वजह से भी टूट जाते है क्योंकि आप ऐसे चैलेंज ले लेते हैं जो वास्तविकता की संभावनाओं से बढ़कर होते हैं। इसलिए चैलेंज ऐसे हों, जिन्हें आप वास्तव में पूरा कर पाएं।
प्राथमिकता में हों बच्चे
माता-पिता अक्सर बच्चों के साथ होते हुए भी लैपटॉप या फोन में व्यस्त रहते हैं। इस साल खुद को चैलेंज दें- दिन के केवल 15 मिनट बिना फोन या गैजेट के अपने बच्चे की पसंद का खेल खेलेंगे या उन से बातें करेंगे। इससे बच्चे को महसूस होगा कि वह आपकी प्राथमिकता है। बच्चे भी यह सीखेंगे कि फोन के बाहर भी दुनिया है।