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नवरात्र में तालियों के साथ घूमते हुए क्यों किया जाता है गरबा? दिलचस्प है गुजरात के इस लोक नृत्य की कहानी

Published: Fri, 09 Oct 2026 02:59 PM (IST)Updated: Tue, 13 Oct 2026 11:08 AM (IST)

गरबा गुजरात का लोक नृत्य है, जिसे नवरात्र के दौरान मां अंबे की आराधना के लिए किया जाता है।

गुजरात के लोक नृत्य गरबा की कहानी (AI Generated Image)

गुजरात के लोक नृत्य गरबा की कहानी (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र का त्योहार हो और गरबा की बात न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। गरबा गुजरात का लोक नृत्य है, जो आज पूरे देश में मशहूर हो चुका है। कई बड़े शहरों में नवरात्र के मौके पर गरबा नाइट्स का आयोजन किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं गरबा की शुरुआत कैसे हुई थी?

गरबा सिर्फ मनोरंजन के लिए किया जाने वाला नृत्य नहीं है। इस नृत्य को मां अंबे की आराधना के लिए किया जाता है। आइए जानें क्या है गरबा का इतिहास।   

कैसे शुरू हुआ गरबा?

गरबा की शुरुआत सदियों पुरानी मानी जाती है। मां अंबे की आराधना के लिए पुराने समय में महिलाएं मिट्टी के मटके में छेद करके उसके अंदर दीपक जलाती थीं और उसके चारों ओर घूमते हुए ताली बजाकर नृत्य करती थीं। मां अंबे का आशीर्वाद लेने के लिए ये नृत्य किया जाता था और इसी से गरबा की शुरुआत हुई। 

कैसे मिला गरबा नाम?

गरबा असल में गर्भ शब्द से बना है। गोल घेरे के बीच रखे मटके को सृष्टि का गर्भ माना जाता है और इसके अंदर जलते दीये की रोशनी जीवन का प्रतीक मानी जाती है। ये जलता हुआ दीया मां अंबे की शक्ति का प्रतीक है, जिससे पूरी सृष्टि में जान है। इस मिट्टी के मटके को गरबो कहा जाता है और इसी से इस नृत्य का नाम गरबा पड़ा।

कैसे किया जाता है गरबा?

गरबा हमेशा एक गोल घेरे में ताली बजाते हुए किया जाता है, जो गरबो के इर्द-गिर्द बनता है। इसकी ताल थोड़ी धीमी होती है, लेकिन जैसे-जैसे ताल तेज होती है नर्तकों के कदम और तालियों की आवाज भी तेज होने लगती है। इस नृत्य में हाथों की ताली और पैरों की ताल पर खास तालमेल बैठाया जाता है और इसी के हिसाब से दो ताली गरबा, तीन ताली गरबा और हिंच किया जाता है। 

क्यों खास है गरबा? 

गरबा मां अंबे की आराधना के लिए किया जाता है। गरबो के चारों ओर घेरे में घूमते हुए महिलाएं और पुरुष मिलकर नृत्य करते हैं। ये नृत्य सभी भेदभावों को भुलाकर एक साथ किया जाता है। इस नृत्य के लिए महिलाएं रंग-बिरंगी चनिया चोली पहनती हैं, जिस पर कौड़ियों, शीशे और खास कढ़ाई का काम होता है। इसके साथ पारंपरिक गहने पहने जाते हैं, जिसमें नृत्य करते समय वे बेहद खूबसूरत लगती हैं। 

वहीं पुरुष एक खास तरह का गुजराती कुर्ता और चोरण पहनते हैं। इसके साथ रंग-बिरंगी पगड़ी पारंपरिक गुजराती लुक देती है। गरबा के गीतों में भी मां अंबे की आराधना की जाती है। पहले महिलाएं खुद से गीत गाकर नृत्य किया करती थीं, लेकिन अब स्पीकर पर गरबा गीत बजाए जाते हैं और लोग उस पर जमकर गरबा करते हैं।